विस्तृत उत्तर
यह कथा होली से भी जुड़ी है और शिव पुराण सहित अनेक पुराणों में विस्तार से वर्णित है।
पूर्ण घटनाक्रम — पार्वती की तपस्या चल रही थी और शिव गहरी समाधि में थे। इंद्र के अनुरोध पर कामदेव अपनी पत्नी रति के साथ मंदर पर्वत पर पहुँचे। वे बसंत ऋतु को साथ लाए — फूल खिले, कोयल बोली, मृदु पवन चली और वातावरण प्रेममय हो गया।
पुष्प-बाण — कामदेव पाँच पुष्प-बाण चलाते हैं — हर्षण, रोचन, मोहन, शोषण और मारण। उन्होंने शिव पर यही पुष्प-बाण चलाया। शिव की ध्यानावस्था भंग हुई और वे क्रोधित हो उठे।
तृतीय नेत्र की अग्नि — शिव ने अपना तृतीय नेत्र खोला। उस नेत्र से प्रचंड अग्नि निकली और कामदेव तत्काल भस्म हो गए। रति विधवा होकर विलाप करने लगीं।
होलाष्टक — पुराणों में मान्यता है कि जिस दिन कामदेव भस्म हुए उस दिन से होलाष्टक के आठ दिन आरंभ होते हैं जो अशुभ माने जाते हैं।





