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शिव-सती-पार्वती कथा⏱ 2 मिनट पठन

शिव ने तीसरे नेत्र से कामदेव को भस्म किया

कामदेव बसंत और रति के साथ आए, पुष्प-बाण से शिव की समाधि भंग की।

संक्षिप्त उत्तर

कामदेव बसंत और रति के साथ आए, पुष्प-बाण से शिव की समाधि भंग की। क्रोधित शिव के तृतीय नेत्र से अग्नि निकली और कामदेव भस्म हुए। इसी दिन से होलाष्टक के आठ दिनों का आरंभ माना जाता है।

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विस्तृत उत्तर

यह कथा होली से भी जुड़ी है और शिव पुराण सहित अनेक पुराणों में विस्तार से वर्णित है।

पूर्ण घटनाक्रम — पार्वती की तपस्या चल रही थी और शिव गहरी समाधि में थे। इंद्र के अनुरोध पर कामदेव अपनी पत्नी रति के साथ मंदर पर्वत पर पहुँचे। वे बसंत ऋतु को साथ लाए — फूल खिले, कोयल बोली, मृदु पवन चली और वातावरण प्रेममय हो गया।

पुष्प-बाण — कामदेव पाँच पुष्प-बाण चलाते हैं — हर्षण, रोचन, मोहन, शोषण और मारण। उन्होंने शिव पर यही पुष्प-बाण चलाया। शिव की ध्यानावस्था भंग हुई और वे क्रोधित हो उठे।

तृतीय नेत्र की अग्नि — शिव ने अपना तृतीय नेत्र खोला। उस नेत्र से प्रचंड अग्नि निकली और कामदेव तत्काल भस्म हो गए। रति विधवा होकर विलाप करने लगीं।

होलाष्टक — पुराणों में मान्यता है कि जिस दिन कामदेव भस्म हुए उस दिन से होलाष्टक के आठ दिन आरंभ होते हैं जो अशुभ माने जाते हैं।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

शिव ने तीसरे नेत्र से कामदेव को भस्म किया — इस कथा का विस्तार क्या है को संदर्भ सहित समझें

शिव ने तीसरे नेत्र से कामदेव को भस्म किया — इस कथा का विस्तार क्या है का सबसे सीधा सार यह है: कामदेव बसंत और रति के साथ आए, पुष्प-बाण से शिव की समाधि भंग की। क्रोधित शिव के तृतीय नेत्र से अग्नि निकली और कामदेव भस्म हुए। इसी दिन...

शिव-सती-पार्वती कथा जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.

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शिव-सती-पार्वती कथा प्रश्नोत्तर
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