ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
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शिव ध्यान📜 शिव पुराण, योग शास्त्र, ध्यान परंपरा2 मिनट पठन

शिव के तीसरे नेत्र का ध्यान कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

भ्रूमध्य (आज्ञा चक्र) पर ध्यान केंद्रित। पद्मासन में, आंखें बंद, शिव के ज्योतिर्मय तीसरे नेत्र की कल्पना। 'ॐ' दीर्घ जप। 10-30 मिनट। महामृत्युंजय मंत्र सहायक। लाभ: अंतर्दृष्टि, एकाग्रता, आज्ञा चक्र जागरण। अत्यधिक जोर से न करें।

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विस्तृत उत्तर

शिव का तीसरा नेत्र (त्रिनेत्र) ललाट के मध्य में स्थित है — यह ज्ञान, अंतर्दृष्टि और संहार शक्ति का प्रतीक है। योग शास्त्र में इसे 'आज्ञा चक्र' (भ्रूमध्य/Third Eye) से जोड़ा जाता है।

ध्यान विधि

  1. 1तैयारी: प्रातःकाल या संध्या समय शांत, स्वच्छ स्थान पर पद्मासन/सुखासन में बैठें। रीढ़ सीधी रखें।
  2. 2प्रारंभ: आंखें बंद करें। 3 बार 'ॐ नमः शिवाय' जपें।
  3. 3भ्रूमध्य पर ध्यान: दोनों भौंहों के बीच (ललाट मध्य) पर ध्यान केंद्रित करें। कल्पना करें कि वहां शिव का तीसरा नेत्र है — ज्योतिर्मय, प्रकाशमान।
  4. 4श्वास: धीमी, गहरी श्वास लें। श्वास छोड़ते समय 'ॐ' का मानसिक जप करें।
  5. 5दृश्य कल्पना: शिव के त्रिनेत्र से नीली/श्वेत ज्योति निकलती हुई कल्पना करें — यह ज्योति आपके ललाट को प्रकाशित कर रही है।
  6. 6अवधि: 10-15 मिनट से आरंभ करें, धीरे-धीरे 30 मिनट तक बढ़ाएं।
  7. 7समापन: धीरे-धीरे आंखें खोलें। शिव को प्रणाम करें।

मंत्र (ध्यान सहित)

  • 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...' (महामृत्युंजय — त्र्यम्बक = तीन नेत्रों वाला)
  • 'ॐ' का दीर्घ उच्चारण — कंपन भ्रूमध्य पर केंद्रित करें।

लाभ

  • अंतर्दृष्टि और विवेक का विकास।
  • एकाग्रता और स्मृति शक्ति में वृद्धि।
  • आज्ञा चक्र का जागरण।
  • मानसिक शांति और निर्भयता।

सावधानी: यह ध्यान अभ्यास है — अत्यधिक जोर से भ्रूमध्य पर ध्यान न लगाएं, सिरदर्द हो सकता है। धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएं। किसी अनुभवी योग शिक्षक से मार्गदर्शन लें।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, योग शास्त्र, ध्यान परंपरा
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