विस्तृत उत्तर
शिव का तीसरा नेत्र (त्रिनेत्र) ललाट के मध्य में स्थित है — यह ज्ञान, अंतर्दृष्टि और संहार शक्ति का प्रतीक है। योग शास्त्र में इसे 'आज्ञा चक्र' (भ्रूमध्य/Third Eye) से जोड़ा जाता है।
ध्यान विधि
- 1तैयारी: प्रातःकाल या संध्या समय शांत, स्वच्छ स्थान पर पद्मासन/सुखासन में बैठें। रीढ़ सीधी रखें।
- 2प्रारंभ: आंखें बंद करें। 3 बार 'ॐ नमः शिवाय' जपें।
- 3भ्रूमध्य पर ध्यान: दोनों भौंहों के बीच (ललाट मध्य) पर ध्यान केंद्रित करें। कल्पना करें कि वहां शिव का तीसरा नेत्र है — ज्योतिर्मय, प्रकाशमान।
- 4श्वास: धीमी, गहरी श्वास लें। श्वास छोड़ते समय 'ॐ' का मानसिक जप करें।
- 5दृश्य कल्पना: शिव के त्रिनेत्र से नीली/श्वेत ज्योति निकलती हुई कल्पना करें — यह ज्योति आपके ललाट को प्रकाशित कर रही है।
- 6अवधि: 10-15 मिनट से आरंभ करें, धीरे-धीरे 30 मिनट तक बढ़ाएं।
- 7समापन: धीरे-धीरे आंखें खोलें। शिव को प्रणाम करें।
मंत्र (ध्यान सहित)
- ▸'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...' (महामृत्युंजय — त्र्यम्बक = तीन नेत्रों वाला)
- ▸'ॐ' का दीर्घ उच्चारण — कंपन भ्रूमध्य पर केंद्रित करें।
लाभ
- ▸अंतर्दृष्टि और विवेक का विकास।
- ▸एकाग्रता और स्मृति शक्ति में वृद्धि।
- ▸आज्ञा चक्र का जागरण।
- ▸मानसिक शांति और निर्भयता।
सावधानी: यह ध्यान अभ्यास है — अत्यधिक जोर से भ्रूमध्य पर ध्यान न लगाएं, सिरदर्द हो सकता है। धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएं। किसी अनुभवी योग शिक्षक से मार्गदर्शन लें।





