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शिव ध्यान📜 योग शास्त्र, शैव तंत्र, ध्यान परंपरा2 मिनट पठन

शिव ध्यान करते समय किस चक्र पर ध्यान केंद्रित करें?

संक्षिप्त उत्तर

आज्ञा चक्र (भ्रूमध्य) सर्वप्रचलित — शिव का तीसरा नेत्र। सहस्रार (मस्तक शीर्ष) उन्नत साधना। अनाहत (हृदय) भक्ति ध्यान। सर्वसुलभ: भ्रूमध्य + ज्योति कल्पना + 'ॐ' जप। अत्यधिक जोर से न लगाएं।

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विस्तृत उत्तर

शिव ध्यान में मुख्य रूप से दो चक्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है:

1आज्ञा चक्र (भ्रूमध्य — Third Eye) — सर्वप्रचलित

दोनों भौंहों के बीच ललाट का मध्य बिंदु। शिव का तीसरा नेत्र यहीं स्थित माना गया है। यह ज्ञान, अंतर्दृष्टि और विवेक का केंद्र है। अधिकतर शिव ध्यान विधियों में इसी चक्र पर ध्यान लगाया जाता है।

2सहस्रार चक्र (मस्तक शीर्ष — Crown) — उन्नत

मस्तक के शीर्ष पर। शिव = सहस्रार में विराजमान चैतन्य। कुंडलिनी शक्ति का अंतिम गंतव्य। गहन साधकों के लिए।

अन्य चक्र (विशेष उद्देश्य)

  • अनाहत चक्र (हृदय): शिव भक्ति/प्रेम ध्यान — 'हृदय में शिव का ध्यान।'
  • विशुद्धि चक्र (गला): नीलकंठ शिव का ध्यान — विष ग्रहण स्थल।

सर्वसुलभ सुझाव

आज्ञा चक्र (भ्रूमध्य) पर ध्यान लगाएं — यह सबसे सरल और प्रभावी है। आंखें बंद करें, भ्रूमध्य पर ज्योति बिंदु/शिवलिंग की कल्पना करें, 'ॐ' का मानसिक जप करें।

सावधानी: अत्यधिक जोर से भ्रूमध्य पर ध्यान न लगाएं — सिरदर्द हो सकता है। धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएं।

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शास्त्रीय स्रोत
योग शास्त्र, शैव तंत्र, ध्यान परंपरा
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