विस्तृत उत्तर
आज्ञा चक्र (भौंहों मध्य, Third Eye) = ज्ञान, अंतर्ज्ञान, दिव्य दृष्टि केन्द्र। बीज मंत्र 'ॐ', 2 पंखुड़ी कमल।
दिव्य दृष्टि अनुभव
1. अंतर्ज्ञान (Intuition): विचार/निर्णय बिना तर्क सही। पूर्वाभास। अन्तर्मन से उत्तर।
2. ॐकार नाद: आज्ञा पर ऊर्जा = नाद ध्वनि। सभी नाद विलीन → ओमकार शाश्वत नाद शेष।
3. प्रकाश दर्शन: श्वेत/नीला/बैंगनी शीतल प्रकाश। ज्ञानेश्वरी: 'ड्रिल मशीन जैसा — प्रकाश आर-पार।'
1दूरदर्शन (Clairvoyance — सीमित): कुछ को दूर की घटनाएँ/व्यक्ति दिखना (ध्यान में)। भविष्य पूर्वाभास। योगसूत्र 'प्रतिभा' सिद्धि अंश। सबको नहीं — साधना लक्ष्य नहीं।
5. त्रिकालज्ञान (आंशिक): भूत-वर्तमान-भविष्य कुछ अंश बोध। पूर्ण = अत्यन्त दुर्लभ।
6. मानसिक: तीव्र एकाग्रता, मन शांत, साक्षी भाव।
7. शारीरिक: भौंहों मध्य दबाव/स्पंदन, कभी सिरदर्द (शुरुआत), आँखें अनायास ऊपर (शाम्भवी मुद्रा)।
8. स्वप्न: अत्यन्त स्पष्ट/दिव्य — देवता दर्शन, ज्योतिर्दर्शन।
सावधानी: दिव्य दृष्टि=शक्ति सूचक, उद्देश्य नहीं (लक्ष्य=आत्म-साक्षात्कार)। सिद्धियों में न उलझें। भ्रम (Hallucination) vs दिव्य = गुरु बताएँ। मानसिक स्वास्थ्य समस्या ≠ आध्यात्मिक।




