विस्तृत उत्तर
गायत्री मंत्र को वेदों का महामंत्र माना जाता है। इसे सस्वर जपने के बजाय मन में जपना (मानसिक जप) सबसे अधिक प्रभावशाली और फलदायी बताया गया है।
मानसिक जप की विधि — मानसिक जप में होठ और जीभ बिल्कुल नहीं हिलने चाहिए। सुखासन में बैठकर आंखें बंद करें और भ्रूमध्य (दोनों भौहों के बीच स्थित आज्ञा चक्र) पर भगवान सूर्य के स्वर्णिम और तेजस्वी प्रकाश का ध्यान करें।
अर्थ की भावना — प्रत्येक श्वास के साथ मन ही मन मंत्र के शब्दों का उच्चारण करें। इसके साथ ही यह भावना करें कि वह तेजस्वी और पापनाशक परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित कर रहा है।
लाभ — बिना ध्वनि किए पूर्ण एकाग्रता से किया गया यह जप साधक की मेधा (बुद्धि) को कुशाग्र करता है और आत्मबल में असीम वृद्धि करता है।




