विस्तृत उत्तर
कुबेर धन के रक्षक (कोषाध्यक्ष) हैं और अष्टलक्ष्मी धन, ऐश्वर्य, संतान, विद्या आदि आठ प्रकार की संपदाओं की दाता (रचयिता) हैं। जब केवल लक्ष्मी की पूजा की जाती है, तो धन आता तो है लेकिन रुकता नहीं। जब दोनों की संयुक्त साधना की जाती है, तो धन का सृजन भी होता है और संचय भी।
इनका संयुक्त महामंत्र है: 'ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्टलक्ष्मि मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः'। इस मंत्र के माध्यम से धन वृद्धि करने के लिए शुक्रवार या पूर्णिमा की रात को उत्तर दिशा (कुबेर की दिशा) की ओर मुख करके बैठें। सामने कुबेर यंत्र और श्री यंत्र स्थापित करें और कमल गट्टे की माला से इसका 108 बार जप करें। यह मंत्र व्यापार में हो रहे घाटे को रोकता है और पैतृक या रुके हुए धन की प्राप्ति के मार्ग खोलता है।





