विस्तृत उत्तर
भगवान विष्णु का अष्टाक्षर (आठ अक्षरों वाला) मंत्र 'ॐ नमो नारायणाय' वैष्णव संप्रदाय का सबसे प्रमुख और मोक्षदायी मंत्र है। 'नार' का अर्थ है जल या सभी जीव, और 'अयण' का अर्थ है निवास स्थान; अर्थात जो सभी जीवों का आश्रय हैं, उन्हें नमन है।
इस मंत्र के जप का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह साधक के भीतर पूर्ण समर्पण (प्रपत्ति भाव) जाग्रत करता है। इसके निरंतर जप से जन्म-जन्मांतर के संचित पाप भस्म हो जाते हैं। यह घर में सुख-शांति, दरिद्रता का नाश और अकाल मृत्यु से रक्षा करता है। विपत्ति के समय इस मंत्र का मानसिक जप करने से भगवान नारायण स्वयं किसी न किसी रूप में साधक की रक्षा के लिए उपस्थित होते हैं। अंत समय में इस मंत्र का स्मरण सीधे बैकुंठ (मोक्ष) की प्राप्ति कराता है।





