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नारायण से जुड़े सभी प्रश्न(25)

नारायण पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 25 प्रश्न उपलब्ध हैं।

कर्मकांड विधि

आचमन का मंत्र क्या है और इसकी विधि क्या है?

आचमन के लिए हाथ में जल लेकर तीन बार क्रमशः 'ॐ केशवाय नमः', 'ॐ नारायणाय नमः' और 'ॐ माधवाय नमः' बोलकर जल ग्रहण किया जाता है। अंत में 'ॐ हृषीकेशाय नमः' बोलकर हाथ धो लिए जाते हैं।

#आचमन#शुद्धि#नारायण
मंत्र साधना

विष्णु अष्टाक्षर मंत्र 'ॐ नमो नारायणाय' के लाभ

अष्टाक्षर मंत्र 'ॐ नमो नारायणाय' पूर्ण समर्पण जाग्रत करता है, सभी पापों को नष्ट करता है, विपत्तियों से रक्षा करता है और अंततः साधक को मोक्ष (बैकुंठ) प्रदान करता है।

#विष्णु#अष्टाक्षर#नारायण
दिव्यास्त्र

नारायणास्त्र कैसे मिलता था?

नारायणास्त्र दो तरीकों से मिलता था — भगवान नारायण की कठोर तपस्या करके, या गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से योग्य गुरु से ज्ञान प्राप्त करके।

#नारायणास्त्र#प्राप्ति#तपस्या
दिव्यास्त्र

नारायणास्त्र किसका अस्त्र है?

नारायणास्त्र भगवान विष्णु के नारायण स्वरूप का अस्त्र है। वे ही इसके मूल अधिपति और स्रोत हैं।

#नारायणास्त्र#नारायण#विष्णु
लोक

मृत्यु के समय भगवान का नाम लेने से क्या होता है?

मृत्यु के समय भगवान का नाम लेने से करोड़ों पाप भस्म हो जाते हैं। अजामिल ने 'नारायण' नाम लिया और यमदूतों से बच गया। इसीलिए मृत्यु के समय तुलसी-शालग्राम रखते हैं।

#मृत्यु#भगवान नाम#पाप नाश
लोक

प्रलय के बाद भुवर्लोक का पुनर्निर्माण कैसे होता है?

प्रलय में जलमग्न त्रैलोक्य में नारायण शेषनाग पर शयन करते हैं। जब ब्रह्मा का अगला दिन (कल्प) शुरू होता है तब वे अपने रजोगुण से भुवर्लोक सहित तीनों लोकों का पुनर्निर्माण करते हैं।

#प्रलय#पुनर्निर्माण#भुवर्लोक
लोक

सांवर्तक मेघ क्या होते हैं?

सांवर्तक मेघ प्रलयकालीन विशेष बादल हैं जो भूलोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक के भस्म होने के बाद सौ वर्षों तक भयंकर वर्षा करके पूरे त्रैलोक्य को जलमग्न कर देते हैं।

#सांवर्तक मेघ#प्रलय#भुवर्लोक
मंत्र विधि

प्रेत मुक्ति के लिए कौन सा मंत्र जपें?

'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' 108 बार, महामृत्युंजय 1,25,000, गीता 15वाँ अध्याय, गरुड़ पुराण पाठ। नारायण बलि + गया पिंडदान = सर्वश्रेष्ठ। विद्वान पंडित से करवाएँ।

#प्रेत मुक्ति#मंत्र#गरुड़ पुराण
प्रलय और विष्णु

विष्णु शेषनाग पर कैसे सो रहे थे?

प्रलय-सागर में विष्णु हजार फनों वाले शेषनाग की छायायुक्त फण-शय्या पर अनिर्वचनीय योग में स्थित होकर शयन कर रहे थे।

#विष्णु#शेषनाग#शेषशय्या
प्रलय वर्णन

प्रलय जल में विष्णु कैसे थे?

प्रलय जल में विष्णु योगात्मा, विश्वात्मा, सर्वात्मा, नारायण और शेषनाग की शय्या पर शयन करते हुए बताए गए हैं।

#विष्णु#प्रलय जल#नारायण
श्रीमद्भागवत

भीष्म पितामह ने कृष्ण को भगवान क्यों माना?

भीष्म ने कृष्ण को भगवान इसलिए माना क्योंकि वे साक्षात नारायण, सबके आदिकारण, सर्वात्मा और अनन्य भक्तों पर कृपा करने वाले परमात्मा हैं।

#भीष्म#कृष्ण भगवान#नारायण
श्रीमद्भागवत

भीष्म पितामह और कृष्ण की कथा क्या है?

भीष्म ने कृष्ण को साक्षात भगवान नारायण माना, युद्ध में उनका पार्थसारथी रूप याद किया और मृत्यु के समय उन्हीं में मन लगाया।

#भीष्म और कृष्ण#कृष्ण#पार्थसारथी
श्रीमद्भागवत

विराट पुरुष रूप कैसा है?

विराट पुरुष रूप में समस्त लोकों की कल्पना है; योगी उसे हजारों पैर, भुजा, मुख, सिर, कान, आँख और आभूषणों से युक्त देखते हैं।

#विराट पुरुष#पुरुष रूप#नारायण
श्रीमद्भागवत

पुरुष अवतार क्या है?

सृष्टि के आरंभ में भगवान ने महत्तत्त्व आदि से पुरुष रूप ग्रहण किया, जिसमें दस इंद्रियाँ, मन और पाँच भूत सोलह कलाएँ थीं।

#पुरुष अवतार#नारायण#विराट रूप
श्रीमद्भागवत

मोक्ष चाहने वालों को किसकी पूजा करनी चाहिए?

मोक्ष चाहने वाले शांत और दोष-दृष्टि से रहित होकर सत्त्वगुणी विष्णु भगवान और उनके अंशों का भजन करते हैं।

#मोक्ष#विष्णु पूजा#नारायण
श्रीमद्भागवत

भागवत पढ़ने से पहले क्या करना चाहिए?

भागवत पाठ से पहले नर-नारायण ऋषि, देवी सरस्वती और श्री व्यासदेव को प्रणाम करना बताया गया है।

#भागवत पाठ#नारायण#सरस्वती
ब्रह्मा काल

ब्रह्मा को नारायण क्यों कहा गया है?

प्रलय की रात में ब्रह्माजी जलराशि में शयन करते हैं, इसलिए उन्हें नारायण कहा गया है।

#ब्रह्मा#नारायण#प्रलय
शिव तत्त्व

प्रलयकाल में नारायण रूप में कौन शयन करते हैं?

प्रलयकालीन जलराशि में सदाशिव का ही नारायण रूप में शयन बताया गया है।

#प्रलयकाल#नारायण#सदाशिव
लोक

भगवान नारायण की पहली सांस की कथा क्या है?

नारायण की पहली सांस से कालचक्र और सृष्टि की गति शुरू हुई।

#नारायण#पहली सांस#क्षीरसागर
लोक

वैकुण्ठ में कौन रहता है?

वैकुण्ठ में नारायण, लक्ष्मी और मुक्त जीव निवास करते हैं।

#वैकुण्ठ#नारायण#मुक्त जीव
लोक

नित्य विभूति क्या है?

नित्य विभूति वैकुण्ठ का शाश्वत आध्यात्मिक क्षेत्र है।

#नित्य विभूति#वैकुण्ठ#नारायण
लोक

सुतल लोक इतना सुरक्षित क्यों है?

सुतल लोक सुरक्षित है क्योंकि स्वयं भगवान नारायण गदा धारण कर उसके द्वार पर रक्षा करते हैं।

#सुतल लोक सुरक्षित#भगवान विष्णु रक्षा#रावण
लोक

सुतल लोक में भगवान विष्णु किस रूप में रहते हैं?

सुतल लोक में भगवान विष्णु नारायण के चतुर्भुज गदापाणि रूप में राजा बलि के द्वारपाल बनकर रहते हैं।

#सुतल लोक विष्णु रूप#नारायण#गदापाणि
त्रिमूर्ति में स्थान

वैष्णव दर्शन के अनुसार सृष्टि का आरंभ कैसे हुआ?

वैष्णव दर्शन: प्रलयकाल में नारायण क्षीरसागर में योगनिद्रा में → सृष्टि की इच्छा → नाभि कमल से ब्रह्मा उत्पन्न → ब्रह्मा के क्रोध-संतप्त ललाट से रुद्र (शिव) उत्पन्न। विष्णु ही मूल आधार जिससे ब्रह्मा और शिव की उत्पत्ति हुई।

#वैष्णव दर्शन#नारायण#नाभि कमल
देवी-देवता एवं उपासना

विष्णु के 1000 नामों में सबसे शक्तिशाली कौन से

विष्णु के 1000 नामों में सर्वाधिक शक्तिशाली हैं — विष्णु, नारायण, जनार्दन, गोविंद, माधव, पुरुषोत्तम, अच्युत, वासुदेव, हृषीकेश और अनंत। ये नाम महाभारत के अनुशासन पर्व में संकलित हैं।

#विष्णु सहस्रनाम#विष्णु के नाम#नारायण
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