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विस्तृत उत्तर
भगवान नारायण की पहली सांस की कथा सृष्टि के प्रथम जागरण की कथा है। महाप्रलय के बाद जब सब कुछ मौन, अंधकार और अव्यक्त अवस्था में था, तब नारायण के भीतर सृजन का संकल्प जागा। उस संकल्प से आदिनाद प्रकट हुआ और फिर उनकी प्रथम श्वास ने कालचक्र को गति दी। इसी क्षण से समय, दिशा, तत्व और ब्रह्मांडीय जीवन की शुरुआत मानी गई।
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