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विस्तृत उत्तर
इस कथा के भाव में विष्णु की श्वास भीतर जाने पर सृष्टि का विस्तार समाप्त होकर लय की ओर लौटता है। जो जगत नाम, रूप और गति में प्रकट हुआ था, वह फिर कारण अवस्था में शांत होने लगता है। समय और तत्वों की सक्रियता घटती है और ब्रह्मांड कारण-जल में विलीन होता है। इसे प्रलय या महाप्रलय के चक्र से जोड़ा गया है।
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