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विस्तृत उत्तर
इस कथा में वैकुण्ठ को शाश्वत माना गया है, इसलिए वह महाप्रलय में नष्ट नहीं होता और न ही नई सृष्टि के साथ पहली बार बनता है। लेकिन जब भौतिक सृष्टि प्रकट होने लगती है, तब वैकुण्ठ की आधारशक्ति उससे जुड़ती है। इसका अर्थ है कि वैकुण्ठ स्वयं पहले से है, पर उसकी दिव्य ऊर्जा नई सृष्टि को आधार देती है। इसलिए यहाँ वैकुण्ठ का निर्माण नहीं, बल्कि वैकुण्ठ-शक्ति का संबंध स्थापित होना बताया गया है।
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