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विस्तृत उत्तर
क्षीरसागर सृष्टि की कारण अवस्था और भगवान विष्णु की योगनिद्रा से जुड़ा है, जबकि वैकुण्ठ भगवान का शाश्वत धाम है। इस कथा में आदिनाद के कंपन से वैकुण्ठ की आधारशक्ति प्रकट होती हुई नई सृष्टि से संबंध बनाती है। क्षीरसागर वह क्षेत्र है जहाँ सृष्टि जागती है, और वैकुण्ठ वह दिव्य आधार है जो भौतिक जगत से परे है। दोनों का संबंध सृष्टि को दिव्य चेतना से जोड़ने वाला बताया गया है।
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