विस्तृत उत्तर
जब नैमित्तिक प्रलय आती है और संकर्षण की अग्नि के भयंकर ताप से महर्लोक रहने योग्य नहीं रह जाता तब भृगु आदि महर्षि महर्लोक को खाली करके जनलोक या सत्यलोक की ओर चले जाते हैं। इसके बाद ब्रह्मा की संपूर्ण रात्रि (जो एक कल्प के बराबर ही होती है अर्थात 4 अरब 32 करोड़ मानवीय वर्ष) के दौरान महर्लोक पूर्णतः रिक्त अवस्था में महाकाश में स्थिर रहता है। न तो इस समय यहाँ कोई निवासी होता है और न ही कोई प्रकाश। परंतु महर्लोक की भौतिक संरचना — जो चिन्मय और मनोमय तत्त्वों से निर्मित है — ब्रह्मा की रात्रि में भी अस्तित्व में रहती है। यह महाकाश में एक रिक्त किंतु अस्तित्वमान लोक के रूप में स्थित रहता है। यही इसकी अकृतक प्रकृति का सबसे प्रत्यक्ष प्रमाण है।
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