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भूमि दोष और अस्थिरता से मुक्ति: वराहावतार के तांत्रिक मंत्र !
वराहावतार

भूमि दोष और अस्थिरता से मुक्ति

📿 पौराणिक•53 सेकंड पढ़ें
अंतिम अपडेट: 24 मई 2025
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शारदातिलक तंत्र और अन्य ग्रंथों से लिए गए ये वराह मंत्र भूमि, स्थिरता और ऐश्वर्य के लिए अद्भुत फलदायक हैं – जानिए विधिपूर्वक प्रयोग और फलश्रुति।

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वराहावतार मंत्र

वराहावतार

भगवान् वराह ने पृथ्वी का उद्धार करने हेतु अवतार लिया था। अतः इनके मंत्र भूमि-संबंधी समस्याओं, स्थिरता, ऐश्वर्य प्राप्ति और बाधा-निवारण के लिए विशेष फलदायी माने जाते हैं। शारदातिलक जैसे प्रतिष्ठित तंत्र ग्रन्थ से प्राप्त मंत्र की विस्तृत विधि और फलश्रुति इसे अत्यंत गोपनीय और शक्तिशाली बनाती है। "भूपतित्वं देहि" (भूमि का स्वामित्व दो) का स्पष्ट उल्लेख इस मंत्र की भूमि-संबंधी समस्याओं के निवारण की क्षमता को इंगित करता है। विभिन्न होम द्रव्यों (कमल, अमलतास, चावल, शहद, धान) के साथ विशिष्ट फलश्रुतियों का वर्णन तांत्रिक सिद्धांतों के अनुरूप है, जहाँ द्रव्य और मंत्र का संयोजन विशिष्ट परिणाम उत्पन्न करता है।

अ. सामान्य वराह मंत्र:

मंत्र १: ॐ वराहाय नमः।

मंत्र २: ॐ सूकराय नमः।

मंत्र ३: ॐ धृतसूकररूपकेशवाय नमः।

स्रोत: पंजाब केसरी में एक लेख में उल्लेखित।

देवता: भगवान् वराह।

फलश्रुति: इन मंत्रों के जाप से समस्याओं का समाधान होता है और मन एकाग्र होता है।

विधि: षोडशोपचार पूजा के उपरांत इन मंत्रों का जाप करना चाहिए।

लेख को संदर्भ सहित पढ़ें

भूमि दोष और अस्थिरता से मुक्ति पर आगे क्या समझना जरूरी है

भूमि दोष और अस्थिरता से मुक्ति के विषय में इस लेख का मूल संकेत यह है: शारदातिलक तंत्र और अन्य ग्रंथों से लिए गए ये वराह मंत्र भूमि, स्थिरता और ऐश्वर्य के लिए अद्भुत फलदायक हैं – जानिए विधिपूर्वक प्रयोग और फलश्रुति।

वराहावतार श्रेणी के लेख आम तौर पर महत्व, विधि, समय, शास्त्रीय आधार और सावधानियों को अलग-अलग हिस्सों में खोलते हैं. Vishnu संग्रह के दूसरे लेख यही पृष्ठभूमि और गहरी करते हैं।

वराह, अवतार, मंत्र जैसे जुड़े विषय आगे पढ़ने से यह समझ आता है कि विषय का व्यवहारिक उपयोग क्या है, किन परिस्थितियों में नियम बदलते हैं और किस जानकारी को प्राथमिकता देनी चाहिए।

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वराहावतार के और लेख पढ़कर इस विषय की पृष्ठभूमि पूरी करें।

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इसी विषय के 5 प्रश्न आपके व्यावहारिक संदेह साफ कर सकते हैं।

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नीचे दिए गए 12 संबंधित लेख इस पेज को आगे बढ़ाते हैं।

❓ इस विषय के 5 प्रश्न

अवतारवाद

वराह अवतार की कथा और महत्व क्या है?

वराह अवतार: हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को पाताल में डुबोया → भगवान ने सूअर (वराह) का रूप लेकर पृथ्वी का उद्धार किया। प्रतीक: पूर्ण रूप से थलचर पशु का विकास।

लोक

वराह अवतार का रूप कैसा था?

वराह अवतार सौ योजन चौड़ा, दो सौ योजन ऊँचा, नीले पर्वत जैसा, तीक्ष्ण दांतों और सूर्य-अग्नि समान तेज वाला था।

पुराण ज्ञान

वराह पुराण में पृथ्वी की उत्पत्ति कथा

वराह पुराण की मुख्य कथा है — हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को समुद्र में छिपा दिया था। भगवान विष्णु ने ब्रह्माजी की नासिका से वराह रूप में प्रकट होकर हिरण्याक्ष का वध किया और पृथ्वी को अपने दाँतों पर धारण कर यथास्थान स्थापित किया।

लोक

वराह अवतार कैसे हुआ?

पृथ्वी को जल से उठाने के लिए भगवान विष्णु वराह रूप में प्रकट हुए।

लोक

वराह अवतार और आदिनाद का क्या संबंध है?

वराह अवतार आदिनाद की सक्रिय, साकार और पृथ्वी-उद्धारक शक्ति है।

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