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परशुराम गायत्री मंत्र और शौर्य की अचूक विधि !
परशुराम

परशुराम गायत्री मंत्र और शौर्य की अचूक विधि !

📿 पौराणिक•2 मिनट पढ़ें
अंतिम अपडेट: 24 मई 2025
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ॐ जामदग्न्याय विद्महे... से लेकर बीज मंत्रों तक, परशुराम मंत्र अन्याय के विरुद्ध शक्ति, आत्मविश्वास, और शौर्य की सिद्धि प्रदान करते हैं — जानिए विधिपूर्वक जप और फल।

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परशुरामावतार मंत्र

परशुरामावतार

भगवान् परशुराम, विष्णु के छठे आवेश अवतार हैं, जो अपने शौर्य, ब्रह्मतेज और अन्याय के प्रतिकार के लिए जाने जाते हैं। उनके मंत्र साधक को अन्याय के विरुद्ध लड़ने की शक्ति, आत्मबल और आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करते हैं। "रां" बीजमंत्र उनकी उग्र शक्ति का द्योतक है। "ब्रह्मक्षत्राय" शब्द उनके ब्राह्मणत्व और क्षत्रियत्व दोनों गुणों को एक साथ दर्शाता है, जो शास्त्र और शस्त्र दोनों में उनकी निपुणता का प्रतीक है। परशुराम का चरित्र ही उग्रता और न्याय-स्थापना से जुड़ा है, अतः उनके मंत्र शत्रुनाश और आत्मरक्षा में प्रभावी हो सकते हैं। "रां" अग्नि बीज (रं˙) का एक रूप हो सकता है, जो तेज, पराक्रम और विनाश की शक्ति से सम्बंधित है। गायत्री मंत्रों में "जामदग्न्याय" (जमदग्नि के पुत्र) और "महावीराय" उनके वंश और पराक्रम को इंगित करते हैं, जबकि "ब्रह्मक्षत्राय" और "क्षत्रियान्ताय" उनके दोहरे स्वरूप और धर्म-स्थापना के उद्देश्य को स्पष्ट करते हैं।

अ. परशुराम गायत्री मंत्र १:

ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुराम: प्रचोदयात्॥

आ. परशुराम गायत्री मंत्र २:

ॐ ब्रह्मक्षत्राय विद्महे क्षत्रियान्ताय धीमहि तन्नो राम: प्रचोदयात्॥

इ. परशुराम बीज मंत्र युक्त मंत्र:

ॐ रां रां ॐ रां रां परशुहस्ताय नम:॥

ई. परशुराम मूल मंत्र:

ॐ परशुरामाय नमः।

उ. परशुराम मंत्र (अन्य):

ॐ ह्रीं क्लीं परशुरामाय नमः।

देवता:

भगवान् परशुराम।

फलश्रुति:

इन मंत्रों के जाप से सर्वकामना सिद्धि, जीवन की समस्त समस्याओं का निवारण, सत्य एवं साहस की प्राप्ति, वीरता, मानसिक दृढ़ता, क्रोध पर नियंत्रण, आत्मविश्वास में वृद्धि और शांति प्राप्त होती है ।

विधि-विधान:

अक्षय तृतीया के दिन इन मंत्रों का जप विशेष फलदायी होता है। जप-ध्यान करने के बाद दशांश हवन पायस-घृत (खीर और घी) से करना चाहिए । सामान्यतः ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर शुद्ध वस्त्र पहनकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुश, ऊन या सूती आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या तुलसी माला से १०८ बार या अधिक जप करना चाहिए।

❓ इस विषय के 5 प्रश्न

अस्त्र शस्त्र

परशुराम के पास कौन-कौन से अस्त्र थे?

परशुराम के पास परशु (फरसा), शार्ङ्ग धनुष (विष्णु का), विजय धनुष (इंद्र से), ब्रह्मास्त्र, पाशुपतास्त्र और अनेक दिव्यास्त्र थे। उन्होंने भीष्म, द्रोण और कर्ण को अस्त्र-शिक्षा दी।

रामचरितमानस — बालकाण्ड

परशुरामजी ने अपना वैष्णव धनुष किसे दिया?

श्रीरामजी को — 'राम रमापति कर धनु लेहू। खेंचहु मिटै मोर संदेहू।' धनुष देने लगे तो वह स्वयं रामजी के पास चला गया — इससे परशुरामजी को निश्चय हुआ कि ये साक्षात् विष्णु हैं।

दिव्यास्त्र

परशुराम ने सुदर्शन चक्र कैसे प्राप्त किया

सुदर्शन चक्र शिव → विष्णु → पार्वती → अग्नि → वरुण की परंपरा से परशुराम को मिला। परशुराम भगवान विष्णु के अवतार हैं इसलिए यह चक्र उनके पास धरोहर के रूप में था।

रामचरितमानस — बालकाण्ड

परशुरामजी ने धनुष तोड़ने पर क्या कहा?

क्रोधित होकर पूछा — किसने शिवजी का धनुष तोड़ा? चेतावनी दी — जिसने तोड़ा उसे दण्ड मिलेगा। फरसा हाथ में लिये सभा में आये — सब डर गये। कहा — यह शिवजी का अपमान है।

रामचरितमानस — बालकाण्ड

परशुरामजी के जाने के बाद क्या हुआ?

जनक ने अयोध्या में दशरथ के पास दूत भेजे — धनुष भंग, जयमाला हुई, बारात लाइये। दशरथ को अपार आनन्द। वसिष्ठजी ने कहा — बारात सजाओ। रानियाँ हर्ष से भरीं।

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