विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत में एक अत्यंत गूढ़ और रहस्यमयी प्रसंग में भगवान अपने वराह अवतार में अवतरित होकर घोर गर्जना करते हैं। इस अलौकिक घटना के समय जनलोक, तपोलोक और महर्लोक के मुनिगण वेदों के गुह्य मंत्रों से भगवान यज्ञेश्वर की स्तुति करते हैं। यह प्रसंग कई महत्वपूर्ण तथ्य स्थापित करता है। पहला — महर्लोक के मुनिगण भगवान के अवतरण से भलीभाँति परिचित हैं और वे तत्काल भगवान की स्तुति करते हैं। दूसरा — यहाँ के मुनिगण वेदों के गुह्य (सबसे गूढ़ और रहस्यमयी) मंत्रों से भगवान की स्तुति करते हैं जो उनकी अत्यंत उच्च ज्ञान-भूमि को दर्शाता है। तीसरा — यह प्रमाणित करता है कि भगवान के प्रति शुद्ध भक्ति और स्तुति ही इस लोक के निवासियों का मुख्य कर्म है।
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