विस्तृत उत्तर
जब ब्रह्मा जी की रात्रि समाप्त होती है और वे प्रातःकाल पुनः जागकर त्रैलोक्य की सृष्टि की रचना आरम्भ करते हैं तब महर्षि भृगु आदि जनलोक या सत्यलोक से पुनः नीचे उतरकर महर्लोक में आ जाते हैं और अपने-अपने सृष्टि-सम्बन्धी अधिकारों को पुनः ग्रहण करते हैं। ये महर्षि अपनी योग-शक्ति और अष्ट-सिद्धियों के बल पर ब्रह्माण्ड के किसी भी लोक में मन की गति से विचरण करने में सक्षम हैं। इसीलिए उनके लिए जनलोक से महर्लोक में लौटना और अपने अधिकार पुनः ग्रहण करना पूर्णतः सहज है। इस प्रकार महर्लोक ब्रह्मा के प्रत्येक कल्प के आरंभ में पुनः अपने निवासियों और ऊर्जा से भर जाता है और नई सृष्टि के लिए प्रजापतियों का कार्यक्षेत्र बन जाता है।
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