विस्तृत उत्तर
यह एक अत्यंत गूढ़ और महत्वपूर्ण प्रश्न है जो महर्लोक की आध्यात्मिक सीमाओं को स्पष्ट करता है। महर्लोक के जो निवासी अपने कल्प के दौरान सत्यलोक तक की यात्रा तय करके ब्रह्मा जी के साथ मोक्ष प्राप्त कर लेते हैं वे आत्यन्तिक प्रलय (परम मोक्ष) को प्राप्त होकर साक्षात् भगवान के परम धाम (वैकुण्ठ) में प्रवेश कर जाते हैं। यह एकमात्र पूर्ण और शाश्वत मुक्ति है। इसके विपरीत जो महर्लोक के निवासी इस कल्प में सत्यलोक तक की यात्रा तय नहीं कर पाते और मोक्ष प्राप्त नहीं करते उन्हें प्राकृतिक महाप्रलय के पश्चात् नई सृष्टि में पुनः सृष्टि चक्र में आना पड़ सकता है। यद्यपि यह पुनर्जन्म साधारण जीवों के पुनर्जन्म से बहुत उच्च और अधिक सात्त्विक होगा परंतु यह मोक्ष नहीं है। इसीलिए भगवद्गीता (८.१६) स्पष्ट करती है कि ब्रह्मलोक तक भी जाने वाले जीव पुनरावर्ती हैं।
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