विस्तृत उत्तर
महर्लोक और मोक्ष में मूलभूत और अत्यंत महत्वपूर्ण अंतर है। महर्लोक भौतिक ब्रह्माण्ड के आवरण के भीतर ही स्थित है। यद्यपि यह अत्यंत पवित्र और सात्त्विक गंतव्य है फिर भी यह जीव का अंतिम गंतव्य या पूर्ण मोक्ष नहीं है। महर्लोक से भी वापसी की संभावना है। इसके विपरीत मोक्ष वह परम अवस्था है जहाँ से कोई वापस नहीं आता। भगवान का वैकुण्ठ धाम या गोलोक धाम तीनों गुणों और प्रलय से सर्वथा परे है। इसीलिए परमार्थ को जानने वाले भक्तियोगी इन मध्यवर्ती लोकों (महर्लोक, जनलोक आदि) के आकर्षण को पार करके सीधे वैकुण्ठ की प्राप्ति का ही लक्ष्य रखते हैं। महर्लोक एक अत्यंत उन्नत पड़ाव है परंतु यात्रा का अंत नहीं।
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