विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण और भागवत पुराण के अनुसार नैमित्तिक प्रलय की प्रक्रिया में एक विशिष्ट और भयावह खगोलीय घटना होती है — सात प्रचंड सूर्यों का प्रकट होना। इस प्रलय की प्रक्रिया अत्यंत भयंकर और प्रदीर्घ होती है। सर्वप्रथम सौ वर्षों तक भयंकर अनावृष्टि (सूखा) होती है जिससे पृथ्वी का समस्त रस और जल सूख जाता है। तत्पश्चात भगवान सूर्य की किरणें सात प्रचंड सूर्यों में विभक्त होकर अपने अत्यंत तीव्र ताप से त्रैलोक्य को जलाना आरम्भ कर देती हैं। इन सात प्रचंड सूर्यों का ताप इतना अधिक होता है कि वे समस्त पृथ्वी का जल सुखा देते हैं और फिर भूर्लोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक को क्रमशः भस्म कर देते हैं। इसके साथ ही पाताल से संकर्षण की अग्नि भी ऊपर उठती है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक




