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ब्रह्मा से जुड़े सभी प्रश्न(258)

ब्रह्मा पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 258 प्रश्न उपलब्ध हैं।

लोक

सत्यलोक में ब्रह्मा के साथ मोक्ष और महर्लोक से पुनर्जन्म में क्या अंतर है?

जो ऋषि महर्लोक से सत्यलोक पहुँचकर ब्रह्मा के साथ वैकुंठ में प्रवेश करते हैं उन्हें पूर्ण मोक्ष मिलता है। जो नहीं पहुँच पाते वे नई सृष्टि में पुनः सृष्टि चक्र में आते हैं।

#सत्यलोक#मोक्ष#ब्रह्मा
लोक

नैमित्तिक प्रलय में स्वर्लोक का क्या होता है?

नैमित्तिक प्रलय में ब्रह्मा के एक दिन (कल्प) के अंत में संवर्तक अग्नि से स्वर्लोक भी भस्म हो जाता है। तब स्वर्लोक के निवासी महर्लोक या जनलोक चले जाते हैं।

#नैमित्तिक प्रलय#स्वर्लोक#ब्रह्मा
लोक

पुष्कर द्वीप में ब्रह्मा जी का आसन कैसा है?

पुष्कर द्वीप में 10 करोड़ पंखुड़ियों वाला विशाल स्वर्ण कमल है जो ब्रह्मा जी का आसन है। यहाँ मानसोत्तर पर्वत पर इन्द्र, यम, वरुण और चंद्र की राजधानियाँ हैं।

#पुष्कर द्वीप#ब्रह्मा#कमल
लोक

पुष्कर द्वीप में ब्रह्मा जी की उपासना क्यों होती है?

पुष्कर द्वीप सबसे बाहरी और विशाल द्वीप है। यहाँ विशाल कमल पुष्प है और निवासी सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी की उपासना करते हैं। यहाँ केवल दो वर्ष — रमणक और धातकि — हैं।

#पुष्कर द्वीप#ब्रह्मा#उपासना
लोक

सुमेरु पर्वत के शिखर पर क्या है?

सुमेरु पर्वत के शिखर पर ब्रह्मा जी की 'ब्रह्मपुरी' (शातकौम्भी) है जो 10,000 योजन विस्तृत है। इसे आठ दिक्पालों की नगरियाँ घेरे हुए हैं।

#सुमेरु पर्वत#ब्रह्मपुरी#ब्रह्मा
दिव्यास्त्र

नागपाश मेघनाद को किसने दिया था

नागपाश मेघनाद को भगवान शिव की कृपा से वरदान में मिला था। यह ब्रह्मा-निर्मित अस्त्र था जिसे शिव ने मेघनाद की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर प्रदान किया था।

#नागपाश दाता#मेघनाद#शिव
दिव्यास्त्र

नागपाश किसका अस्त्र था

नागपाश भगवान ब्रह्मा का निर्मित अस्त्र था जो मेघनाद (इंद्रजीत) को वरदान में मिला था। मेघनाद इसे अत्यंत कठिन स्थिति में ही प्रयोग करता था क्योंकि यह उसका सर्वाधिक घातक अस्त्र था।

#नागपाश#मेघनाद इंद्रजीत#शिव वरदान
लोक

प्रलय के बाद भुवर्लोक का पुनर्निर्माण कैसे होता है?

प्रलय में जलमग्न त्रैलोक्य में नारायण शेषनाग पर शयन करते हैं। जब ब्रह्मा का अगला दिन (कल्प) शुरू होता है तब वे अपने रजोगुण से भुवर्लोक सहित तीनों लोकों का पुनर्निर्माण करते हैं।

#प्रलय#पुनर्निर्माण#भुवर्लोक
लोक

ब्रह्मा के रजोगुण से तीन लोकों की रचना कैसे हुई?

भागवत के अनुसार ब्रह्मा जी ने अपने तपोबल और रजोगुण से भूः, भुवः और स्वः की रचना की। रजोगुण से उत्पन्न होने के कारण ये तीनों परिवर्तनशील और नश्वर हैं।

#ब्रह्मा#रजोगुण#तीन लोक
दिव्यास्त्र

मेघनाद को अदृश्यता की शक्ति कहाँ से मिली?

मेघनाद की अदृश्यता का स्रोत विवादित है — एक मत अंतर्धान अस्त्र को श्रेय देता है जबकि अन्य ग्रंथ माया, शिव-ब्रह्मा के वरदान और निकुंभिला यज्ञों को कारण मानते हैं।

#मेघनाद#अदृश्यता#माया
दिव्यास्त्र

नागपाश का निर्माण किसने किया था?

कुछ कथाओं के अनुसार नागपाश का निर्माण स्वयं ब्रह्मा ने एक विशेष यज्ञ द्वारा किया था, जिसे बाद में उन्होंने महादेव को दे दिया था।

#नागपाश#निर्माण#ब्रह्मा
दिव्यास्त्र

ब्रह्मदंड क्या है ब्रह्मा का अस्त्र

ब्रह्मदंड ब्रह्मा का दिव्य दंड है जो किसी भी अस्त्र को निष्प्रभावी कर देता है। वशिष्ठ के पास यह था — जब विश्वामित्र ने सेना से आक्रमण किया तब वशिष्ठ ने ब्रह्मदंड से सब कुछ निगल लिया।

#ब्रह्मदंड#ब्रह्मा#वशिष्ठ
दिव्यास्त्र

ब्रह्मास्त्र किसने बनाया

ब्रह्मास्त्र के निर्माणकर्ता स्वयं परमपिता ब्रह्मा हैं। यह दैत्यनाश के लिए बनाया गया था। महाभारत में द्रोण, अश्वत्थामा, अर्जुन, कर्ण आदि गिने-चुने महायोद्धाओं के पास था।

#ब्रह्मास्त्र निर्माण#ब्रह्मा#दैत्य नाश
दिव्यास्त्र

ब्रह्मास्त्र क्या होता है

ब्रह्मास्त्र ब्रह्मा की शक्ति से संचालित अमोघ दिव्यास्त्र है। जिस पर चले उसका नाश निश्चित। दो ब्रह्मास्त्रों के टकराने से प्रलय का भय था। जहाँ प्रयुक्त हो वहाँ 12 वर्ष दुर्भिक्ष।

#ब्रह्मास्त्र#ब्रह्मा#दिव्यास्त्र
दिव्यास्त्र

वृत्रासुर को कौन सा वरदान मिला था?

वृत्रासुर को ब्रह्मा से वरदान था कि उसे किसी भी धातु, लकड़ी या पत्थर के अस्त्र से — न सूखे से, न गीले से, न दिन में, न रात में — नहीं मारा जा सकता।

#वृत्रासुर#वरदान#ब्रह्मा
दिव्यास्त्र

यमराज को कालदण्ड कैसे मिला?

यमराज को कालदण्ड स्वयं सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने प्रदान किया था ताकि वे जीवों के कर्मों का न्याय कर सकें।

#कालदण्ड#यमराज#ब्रह्मा
दिव्यास्त्र

ब्रह्मा जी ने यमराज को कालदण्ड न चलाने के लिए क्यों कहा?

ब्रह्मा जी ने दो कारणों से रोका — रावण को मनुष्य से मृत्यु का वरदान था, और कालदण्ड की शक्ति से समस्त सृष्टि का विनाश हो सकता था।

#ब्रह्मा#यमराज#कालदण्ड
दिव्यास्त्र

यमराज ने कालदण्ड का प्रयोग रावण पर क्यों नहीं किया?

ब्रह्मा जी ने हस्तक्षेप किया क्योंकि रावण को वरदान था कि वह मनुष्य के हाथों मरेगा, देवता के नहीं। साथ ही कालदण्ड से समस्त सृष्टि नष्ट हो सकती थी।

#कालदण्ड#यमराज#रावण
शिव अस्त्र-शस्त्र

पिनाक धनुष किसने बनाया था

पिनाक धनुष का निर्माण देव-शिल्पी विश्वकर्मा ने किया था — दिव्य बाँस से। उन्होंने दो धनुष बनाए — पिनाक शिव को और सारंग विष्णु को दिया।

#पिनाक निर्माण#विश्वकर्मा#ब्रह्मा
शिव पूजा नियम

शिवलिंग पर केतकी का फूल चढ़ाना क्यों वर्जित माना गया है?

शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता): ब्रह्मा-विष्णु के श्रेष्ठता विवाद में शिव ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए। ब्रह्मा जी ने ऊपरी छोर देखने का झूठ बोला — केतकी ने झूठी गवाही दी। शिव ने क्रुद्ध होकर केतकी को श्राप दिया — शिव पूजा में सदा के लिए वर्जित। यह सर्वमान्य निषेध है, निर्णयसिंधु में भी पुष्टि मिलती है।

#केतकी#केवड़ा#शिवलिंग
सृष्टि तत्त्व

शिव बीजी, ब्रह्मा बीज और विष्णु योनि कैसे हैं?

विष्णु ने कहा कि शिव बीजवान् हैं, ब्रह्मा बीज हैं और वे स्वयं योनि हैं; शिव के लिंग से निकला बीज विष्णु की योनि में गिरा।

#बीजी#बीज#योनि
शिवमाहात्म्य

विष्णु ने ब्रह्मा को शिव के बारे में क्या बताया?

विष्णु ने बताया कि आने वाले प्रभु आदि-अन्तरहित पार्वतीनाथ शिव हैं, जो धर्मस्वरूप, प्रचण्ड, महायोग-प्रदीपक और वरदाता हैं।

#विष्णु#ब्रह्मा#शिवमाहात्म्य
महादेव आगमन

ब्रह्मा ने शिव को देखकर क्या सोचा?

ब्रह्मा ने अद्भुत रूप वाले शिव को आते देखकर विष्णु से पूछा कि यह विशाल, दस भुजाओं वाला, त्रिशूलधारी और भयंकर तेजस्वी प्राणी कौन है।

#ब्रह्मा#शिव दर्शन#दश भुजा
ब्रह्मा-विष्णु संवाद

ब्रह्मा और विष्णु में संघर्ष क्यों हुआ?

शिव की माया से मोहित होकर ब्रह्मा और विष्णु एक-दूसरे की महिमा में उलझे, और समुद्र के मध्य उनके बीच संघर्ष चल रहा था।

#ब्रह्मा#विष्णु#संघर्ष
ब्रह्मा नाम

ब्रह्मा को पद्मयोनि क्यों कहा गया?

विष्णु ने ब्रह्मा से कहा कि वे कमल से उतर आएँ और आज से पद्मयोनि नाम से लोक में प्रसिद्ध होंगे।

#ब्रह्मा#पद्मयोनि#नाभिकमल
नाभिकमल

ब्रह्मा विष्णु की नाभि से बाहर कैसे आए?

सभी द्वार बंद देखकर ब्रह्मा ने अत्यन्त सूक्ष्म रूप धारण किया, नाभि में मार्ग पाया और कमलनाल से बाहर आए।

#ब्रह्मा#विष्णु नाभि#कमलनाल
उदर में लोक

ब्रह्मा ने विष्णु के भीतर क्या देखा?

ब्रह्मा ने विष्णु के उदर में वही सब लोक देखे जो विष्णु ने उनके उदर में देखे थे, पर वे भी उसका अंत नहीं पा सके।

#ब्रह्मा#विष्णु#उदर
उदर में लोक

विष्णु ने ब्रह्मा के भीतर क्या देखा?

विष्णु ने ब्रह्मा के उदर में अठारह द्वीप, समुद्र, पर्वत, चार वर्ण, सात लोक और स्थावर-जंगम सब कुछ देखा।

#विष्णु#ब्रह्मा#उदर
शिव माया

शिव की माया क्या करती है?

शिव की माया ब्रह्मा और विष्णु को मोहित करती है; कल्प के आरम्भ में ब्रह्मा का ज्ञान भी उससे नष्ट हो जाता है।

#शिव माया#मोह#ब्रह्मा
शिव माया

ब्रह्मा और विष्णु एक-दूसरे को क्यों नहीं पहचान पाए?

वे महात्मा शिव की माया से मोहित थे, इसलिए ब्रह्मा विष्णु को पहचान नहीं पाए और दोनों अपने-अपने आदिकर्ता भाव में बोलने लगे।

#ब्रह्मा#विष्णु#शिव माया
ब्रह्मा-विष्णु संवाद

ब्रह्मा ने विष्णु से क्या पूछा?

ब्रह्मा ने विष्णु से पूछा कि आप कौन हैं और समुद्र के मध्य आश्रय लेकर क्यों सो रहे हैं।

#ब्रह्मा#विष्णु#प्रश्न
नाभिकमल

ब्रह्मा का जन्म कमल से कैसे हुआ?

विष्णु ने अपनी नाभि से एक विशाल कमल उत्पन्न किया; बाद में ब्रह्मा कमलनाल के सहारे नाभि से बाहर आकर उसी कमल पर शोभित हुए।

#ब्रह्मा#कमल जन्म#नाभिकमल
महादेव का उपदेश

महादेव ने विष्णु को क्या आदेश दिया?

महादेव ने विष्णु से चराचर जगत का पालन करने, मोह छोड़ने और पितामह ब्रह्मा का पालन करने को कहा।

#महादेव#विष्णु#जगत पालन
वरदान

विष्णु ने शिव से कौन सा वर मांगा?

विष्णु ने वर माँगा कि ब्रह्मा और विष्णु दोनों की महादेव के प्रति सदा दृढ़ भक्ति बनी रहे।

#विष्णु#शिव#वरदान
ब्रह्मा-विष्णु

ब्रह्मा और विष्णु शिव से कैसे जुड़े हैं?

महादेव ने कहा कि ब्रह्मा उनके दाएँ अंग से और विश्वात्मा विष्णु उनके बाएँ अंग से उत्पन्न हुए हैं।

#ब्रह्मा#विष्णु#शिव
शिव तत्त्व

शिव सृष्टि, पालन और संहार कैसे करते हैं?

महादेव ने कहा कि वे निष्कल परमेश्वर ही ब्रह्मा, विष्णु और भव रूपों में सृजन, पालन और संहार से युक्त हैं।

#सृष्टि#पालन#संहार
शिव तत्त्व

शिव के तीन रूप कौन से हैं?

निष्कल परमेश्वर शिव ब्रह्मा, विष्णु और भव नामों से तीन रूपों में सृजन, पालन और संहार के गुणों से युक्त हैं।

#शिव के तीन रूप#ब्रह्मा#विष्णु
शिव भक्ति

ब्रह्मा और विष्णु को शिव भक्ति कैसे मिली?

महादेव के प्रसन्न होने पर विष्णु ने दृढ़ भक्ति का वर माँगा और महादेव ने दोनों को अचल श्रद्धा-भक्ति दी।

#ब्रह्मा#विष्णु#शिव भक्ति
शिवलिंग पूजा

शिवलिंग पूजा की शुरुआत कैसे हुई?

ब्रह्मा-विष्णु को वर देकर महादेव के अन्तर्धान होने के बाद लोकों में शिवलिंग पूजन की प्रसिद्धि फैल गई।

#शिवलिंग पूजा#महादेव#ब्रह्मा
सृष्टि क्रम

आकाश और पृथ्वी की उत्पत्ति कैसे बताई गई है?

स्वर्ण अंड के ऊपरी पवित्र कपाल से आकाश और नीचे के भाग से पाँच लक्षणों वाली पृथ्वी की उत्पत्ति बताई गई है।

#आकाश#पृथ्वी#स्वर्ण अंड
सृष्टि क्रम

स्वर्ण अंड से सृष्टि कैसे हुई?

लिंगरूप प्रणव से बीज योनि में स्थित होकर बढ़ा, स्वर्ण अंड बना और परमेश्वर ने उसे दो भागों में विभाजित किया।

#स्वर्ण अंड#सृष्टि#प्रणव
त्रिदेव और ओम्

ब्रह्मा, विष्णु और शिव का संबंध ओम् से कैसे बताया गया है?

ओम् से अकाररूप ब्रह्मा, उकाररूप विष्णु और मकाररूप नीललोहित शिव का प्रादुर्भाव बताया गया है।

#ब्रह्मा#विष्णु#शिव
प्रणव ओम्

अकार, उकार और मकार का क्या अर्थ है?

अकार से ब्रह्मा, उकार से विष्णु और मकार से परमेश्वर नीललोहित शिव का प्रादुर्भाव बताया गया है।

#अकार#उकार#मकार
लिंग तत्त्व

शिवलिंग का आदि और अंत क्यों नहीं मिला?

लिंग क्षय-वृद्धि से रहित, अव्यक्त और आदि-मध्य-अन्त से हीन था, इसलिए उसका मूल या अंत नहीं मिला।

#आदि अंत#अनन्त लिंग#ज्योतिर्लिंग
लिंग अन्वेषण

ब्रह्मा ने हंस रूप क्यों लिया?

ब्रह्मा ने अग्नि-स्तंभ रूप लिंग का ऊपरी अंत खोजने के लिए हंस रूप धारण किया।

#ब्रह्मा#हंस रूप#लिंग अंत
लिंग अन्वेषण

ब्रह्मा और विष्णु शिवलिंग का अंत क्यों नहीं पा सके?

वह लिंग आदि-मध्य-अन्त से हीन और अवर्णनीय था, इसलिए ब्रह्मा ऊपर जाकर भी अंत और विष्णु नीचे जाकर भी मूल नहीं पा सके।

#ब्रह्मा#विष्णु#अनादि अनन्त
ज्योतिर्लिंग

ज्योतिर्मय अग्नि-स्तंभ क्या था?

ज्योतिर्मय अग्नि-स्तंभ वही लिंग था जो ब्रह्मा-विष्णु के कलह को दूर करने और ज्ञान देने के लिए प्रकट हुआ।

#ज्योतिर्मय अग्नि स्तंभ#लिंग#ब्रह्मा
ब्रह्मा-विष्णु विवाद

ब्रह्मा और विष्णु में विवाद क्यों हुआ?

विष्णु की माया से मोहित होकर ब्रह्मा और विष्णु दोनों ने स्वयं को सृष्टि, पालन और संहार का कर्ता कहा, इसलिए विवाद हुआ।

#ब्रह्मा#विष्णु#विवाद
लिंगोद्भव

शिवलिंग की उत्पत्ति कैसे हुई?

ब्रह्मा और विष्णु के विवाद को दूर करने तथा ज्ञान देने के लिए समुद्र में ज्योतिर्मय, आदि-अन्तहीन लिंग प्रकट हुआ।

#शिवलिंग#लिंगोद्भव#ब्रह्मा
अघोर दर्शन

अघोर शिव ने ब्रह्मा को दर्शन कैसे दिया?

ब्रह्मा ने ध्यान और शरणागति से अघोर को ब्रह्मस्वरूप मानकर ध्यान किया, तब अघोर महादेव ने उन्हें साक्षात् दर्शन दिया।

#अघोर दर्शन#ब्रह्मा#ध्यान
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