विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण के द्वितीय अंश के सप्तम अध्याय में महर्षि पराशर ने सृष्टि के सर्ग और प्रतिसर्ग (प्रलय) का वर्णन किया है। विष्णु पुराण स्पष्ट करता है कि जब ब्रह्मा जी का एक दिन (कल्प) समाप्त होता है और नैमित्तिक प्रलय आती है तो सूर्य की प्रचंड ऊष्मा (संवर्तक अग्नि) भूर्लोक और भुवर्लोक के साथ-साथ स्वर्लोक को भी भस्म कर देती है। उस प्रलय की भयानक गर्मी से बचने के लिए स्वर्लोक के निवासी और महर्षि वहाँ से पलायन करके महर्लोक या जनलोक की ओर चले जाते हैं। अतः विष्णु पुराण के अनुसार स्वर्लोक की भौतिक संरचना भी ब्रह्मा के कल्प के अंत में नष्ट हो जाती है। यह स्वर्लोक की अनित्यता का एक और प्रमाण है।
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