विस्तृत उत्तर
ब्रह्मा जी ने देखा कि उनके ब्रह्मांड में अकाल विखंडन शुरू हो गया है, जबकि नियत प्रलय का समय नहीं आया था। इसी कारण वे अत्यंत उद्विग्न हुए।
ब्रह्मा जी क्यों उद्विग्न हुए को संदर्भ सहित समझें
ब्रह्मा जी क्यों उद्विग्न हुए का सबसे सीधा सार यह है: असमय ब्रह्मांड-पतन देखकर वे व्याकुल हुए।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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सत्यलोक में ब्रह्मा के साथ मोक्ष और महर्लोक से पुनर्जन्म में क्या अंतर है?
जो ऋषि महर्लोक से सत्यलोक पहुँचकर ब्रह्मा के साथ वैकुंठ में प्रवेश करते हैं उन्हें पूर्ण मोक्ष मिलता है। जो नहीं पहुँच पाते वे नई सृष्टि में पुनः सृष्टि चक्र में आते हैं।
नैमित्तिक प्रलय में स्वर्लोक का क्या होता है?
नैमित्तिक प्रलय में ब्रह्मा के एक दिन (कल्प) के अंत में संवर्तक अग्नि से स्वर्लोक भी भस्म हो जाता है। तब स्वर्लोक के निवासी महर्लोक या जनलोक चले जाते हैं।
पुष्कर द्वीप में ब्रह्मा जी का आसन कैसा है?
पुष्कर द्वीप में 10 करोड़ पंखुड़ियों वाला विशाल स्वर्ण कमल है जो ब्रह्मा जी का आसन है। यहाँ मानसोत्तर पर्वत पर इन्द्र, यम, वरुण और चंद्र की राजधानियाँ हैं।
पुष्कर द्वीप में ब्रह्मा जी की उपासना क्यों होती है?
पुष्कर द्वीप सबसे बाहरी और विशाल द्वीप है। यहाँ विशाल कमल पुष्प है और निवासी सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी की उपासना करते हैं। यहाँ केवल दो वर्ष — रमणक और धातकि — हैं।
सुमेरु पर्वत के शिखर पर क्या है?
सुमेरु पर्वत के शिखर पर ब्रह्मा जी की 'ब्रह्मपुरी' (शातकौम्भी) है जो 10,000 योजन विस्तृत है। इसे आठ दिक्पालों की नगरियाँ घेरे हुए हैं।
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