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बगलामुखी 36 अक्षरी मंत्र: शत्रु विजय व रक्षा का ब्रह्मास्त्र !
बगलामुखी

बगलामुखी 36 अक्षरी मंत्र: शत्रु विजय व रक्षा

📿 पौराणिक•2 मिनट पढ़ें
अंतिम अपडेट: 19 मई 2025
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जानिए पीताम्बरा देवी के दुर्लभ मंत्रों की साधना विधि, मंत्रजप की संख्या, हवन-विधान और उनके रहस्यमयी तांत्रिक प्रभाव जो बनाते हैं साधक को अजेय

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बगलामुखी ब्रह्मास्त्र एवं 36 अक्षरी मंत्र
बगलामुखी ब्रह्मास्त्र मंत्र एवं 36 अक्षरी मंत्र (शत्रु स्तंभन एवं विजय हेतु)
ब्रह्मास्त्र मंत्र:
ॐ नमो भगवति चामुण्डे नरकंक गृध्रोलूक परिवार सहिते श्मशानप्रिये नररुधिरमांस चरु भोजन प्रियेसिद्ध विद्याधर वृन्द वंदित चरणे बृह्मेशविष्णु वरुण कुबेर भैरवी भैरव प्रिये इन्द्रक्रोध विनिर्गत शरीरे द्वादशादित्य चण्डप्रभे अस्थि मुण्ड कपाल मालाभरणे शीघ्रं दक्षिण दिशि आगच्छ आगच्छ, मानय मानय, नुद नुद, सर्व शत्रुणां मारय मारय, चूर्णय चूर्णय, आवेशय आवेशय, त्रुट त्रुट, त्रोटय त्रोटय, स्फुट स्फुट, स्फोटय स्फोटय, महाभूतान् जृम्भय जृम्भय, ब्रह्मराक्षसान उच्चाटय उच्चाटय, भूत प्रेत पिशाचान् मूर्च्छय मूर्च्छय, मम शत्रुन उच्चाटय उच्चाटय, शत्रून चूर्णय चूर्णय, सत्यं कथय कथय, वृक्षेभ्यः संन्नाशय संन्नाशय अर्कं स्तंभय स्तंभय , गरुड पक्षपातेन विषं निर्विषं कुरु कुरु, लीलांगालयवृक्षेभ्यः परिपातय परिपातय, शैलकाननमहीं मर्दय मर्दय, मुखं उत्पाटय उत्पाटय, पात्रं पूरय पूरय, भूतभविष्यं यत्सर्व कथय कथय, कृन्त कृन्त, दह दह, पच पच, मथ मथ, प्रमथ प्रमथ, घर्घर घर्घर, ग्रासय ग्रासय, विद्रावय विद्रावय उच्चाटय उच्चाटय, विष्णुचक्रेण वरुणपाशेन इन्द्रवज्रेण ज्वरं नाशय नाशय, प्रविदं स्फोटय स्फोटय , सर्वशत्रून मम वशं कुरु कुरु, पातालं प्रत्यंतरिक्षं आकाशग्रहं आनय आनय, करालि विकरालि महाकालि, रुद्रशक्ते पूर्वदिशं निरोधय निरोधय, पश्चिमदिशं स्तम्भय स्तम्भय, दक्षिणदिशं निधय निधय, उत्तरदिशं बंधय बंधय, ह्रां ह्रीं ॐ बंधय बंधय, ज्वालामालिनी स्तम्भिनी मोहिनि, मुकुट विचित्र कुण्डल नागादि वासुकी कृत हारभूषणे मेखला चन्द्रार्कहास प्रभंजने विद्युत्स्फुरित सकाश साट्टहास निलय निलय, हुं फट्, हुं फट् विजृंभित शरीरे सप्तद्वीप कृते ब्रह्माण्ड विस्तारित स्तन युगले असि मुसल परशु तोमर क्षुरिपाश हलेषु वीरान् शमय शमय, सहस्त्र बाहु परापरादिशक्ति विष्णु शरीरे, शंकर ह्रदयेश्वरी बगलामुखी सर्वदुष्टान् विनाशय विनाशय, हुं फट् स्वाहा ।
36 अक्षरी मंत्र:
ॐ ह्लीं बगलामुखी ये केचनापकारिणः सन्ति, तेषां वाचं मुखं स्तम्भय स्तम्भय, जिह्वां कीलय कीलय, बुद्धिं विनाशय विनाशय, ह्रीं ॐ स्वाहा
देवता: बगलामुखी (पीताम्बरा देवी)
स्रोत: स्वतंत्र तंत्र में ब्रह्मास्त्र मंत्र, मेरु तंत्र में 36 अक्षरी मंत्र
प्रयोजन: शत्रु स्तंभन, शत्रु बुद्धि विनाश, विवादों में विजय, पाप, दरिद्रता एवं रोग निवारण, दुर्घटनाओं से रक्षा, तथा सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों का शमन
विधि:
  • पीले वस्त्र, पीला आसन, तथा हल्दी की माला का प्रयोग करें।
  • चने की दाल से निर्मित यंत्र का विधान है।
  • जप का उत्तम समय रात्रि 10 बजे से प्रातः 5 बजे के मध्य है।
  • ३६ अक्षरी मंत्र का एक लाख जप द्वारा सिद्धि, विशेष हेतु पांच लाख जप करें।
  • जप के बाद दशांश हवन एवं तर्पण आवश्यक।
  • यह साधना अत्यंत उग्र मानी जाती है, अतः सदैव गुरु मार्गदर्शन में ही करें।
महत्व: बगलामुखी दस महाविद्याओं में से एक हैं, जिनकी शक्ति स्तंभन के लिए प्रसिद्ध है। ब्रह्मास्त्र मंत्र एवं 36 अक्षरी मंत्र उनके अत्यंत गोपनीय व शक्तिशाली मंत्रों में हैं। इनकी साधना कठिन नियमों व गुरु मार्गदर्शन के बिना संभव नहीं। यह मंत्र साधक के चारों ओर अभेद्य सुरक्षा कवच का निर्माण करते हैं एवं साधक को शत्रु एवं नकारात्मक शक्तियों से रक्षा प्रदान करते हैं।

❓ इस विषय के 5 प्रश्न

तंत्र साधना

बगलामुखी मंत्र जप के नियम

बगलामुखी साधना में पीले वस्त्र, पीला आसन और हल्दी की माला का उपयोग अनिवार्य है। यह अनुष्ठान रात्रि में होता है और इसमें ब्रह्मचर्य का पालन अत्यंत आवश्यक है।

यंत्र

बगलामुखी यंत्र की स्थापना और पूजा विधि क्या है?

बगलामुखी = शत्रु स्तंभन देवी। पीला रंग सर्वत्र — पीले कपड़े/पुष्प/मिठाई/दीपक/हल्दी माला। 'ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः' 108। मंगलवार/शनिवार। शत्रु/मुकदमा/वाक्शक्ति। विशेष अनुष्ठान = गुरु।

दशमहाविद्या

बगलामुखी माता की पूजा शत्रु बाधा में कैसे सहायक है?

स्तंभन शक्ति — शत्रु वाक्/बुद्धि/गति रोकना। कोर्ट केस विजय, षड्यंत्र विफल। 'ॐ ह्लीं बगलामुखी...' मंत्र। पीला रंग प्रधान। महाभारत: कृष्ण-अर्जुन ने पूजा की (अमर उजाला)।

तंत्र साधना

बगलामुखी साधना कैसे करें?

बगलामुखी = पीताम्बरा — स्तम्भन विद्या। सब पीला अनिवार्य: वस्त्र, पुष्प, भोग, माला। मंत्र: 'ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं... स्तम्भय' (9 लाख)। हवन: हल्दी + घी। मंगलवार। ध्यान: पीतवर्णा, शत्रु-जिह्वा-ग्राहिणी। फल: शत्रु-स्तम्भन, न्यायिक विजय, अभिचार-रक्षण। दीक्षा अनिवार्य।

माला नियम

हल्दी की गांठ की माला किस देवी के मंत्र जप के लिए उत्तम है?

बगलामुखी सर्वोत्तम (पीला = बगलामुखी)। गणेश, बृहस्पति भी शुभ। शत्रु/कोर्ट/स्तंभन। 108 गांठें, शुक्रवार/मंगलवार। सूखी जगह (नमी बचाव)।

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