बगलामुखी ब्रह्मास्त्र मंत्र एवं 36 अक्षरी मंत्र (शत्रु स्तंभन एवं विजय हेतु)
ब्रह्मास्त्र मंत्र:
ॐ नमो भगवति चामुण्डे नरकंक गृध्रोलूक परिवार सहिते श्मशानप्रिये नररुधिरमांस चरु भोजन प्रियेसिद्ध
विद्याधर वृन्द वंदित चरणे बृह्मेशविष्णु वरुण कुबेर भैरवी भैरव प्रिये इन्द्रक्रोध विनिर्गत शरीरे द्वादशादित्य
चण्डप्रभे अस्थि मुण्ड कपाल मालाभरणे शीघ्रं दक्षिण दिशि आगच्छ आगच्छ, मानय मानय, नुद नुद,
सर्व शत्रुणां मारय मारय, चूर्णय चूर्णय, आवेशय आवेशय, त्रुट त्रुट, त्रोटय त्रोटय, स्फुट स्फुट,
स्फोटय स्फोटय, महाभूतान् जृम्भय जृम्भय, ब्रह्मराक्षसान उच्चाटय उच्चाटय,
भूत प्रेत पिशाचान् मूर्च्छय मूर्च्छय, मम शत्रुन उच्चाटय उच्चाटय, शत्रून चूर्णय
चूर्णय, सत्यं कथय कथय, वृक्षेभ्यः संन्नाशय संन्नाशय अर्कं स्तंभय स्तंभय ,
गरुड पक्षपातेन विषं निर्विषं कुरु कुरु, लीलांगालयवृक्षेभ्यः परिपातय परिपातय,
शैलकाननमहीं मर्दय मर्दय, मुखं उत्पाटय उत्पाटय, पात्रं पूरय पूरय, भूतभविष्यं
यत्सर्व कथय कथय, कृन्त कृन्त, दह दह, पच पच, मथ मथ, प्रमथ प्रमथ,
घर्घर घर्घर, ग्रासय ग्रासय, विद्रावय विद्रावय उच्चाटय उच्चाटय, विष्णुचक्रेण
वरुणपाशेन इन्द्रवज्रेण ज्वरं नाशय नाशय, प्रविदं स्फोटय स्फोटय , सर्वशत्रून
मम वशं कुरु कुरु, पातालं प्रत्यंतरिक्षं आकाशग्रहं आनय आनय, करालि
विकरालि महाकालि, रुद्रशक्ते पूर्वदिशं निरोधय निरोधय, पश्चिमदिशं
स्तम्भय स्तम्भय, दक्षिणदिशं निधय निधय, उत्तरदिशं बंधय बंधय,
ह्रां ह्रीं ॐ बंधय बंधय, ज्वालामालिनी स्तम्भिनी मोहिनि, मुकुट
विचित्र कुण्डल नागादि वासुकी कृत हारभूषणे मेखला चन्द्रार्कहास
प्रभंजने विद्युत्स्फुरित सकाश साट्टहास निलय निलय, हुं फट्, हुं
फट् विजृंभित शरीरे सप्तद्वीप कृते ब्रह्माण्ड विस्तारित स्तन युगले
असि मुसल परशु तोमर क्षुरिपाश हलेषु वीरान् शमय शमय,
सहस्त्र बाहु परापरादिशक्ति विष्णु शरीरे, शंकर ह्रदयेश्वरी
बगलामुखी सर्वदुष्टान् विनाशय विनाशय, हुं फट् स्वाहा ।
36 अक्षरी मंत्र:
ॐ ह्लीं बगलामुखी ये केचनापकारिणः सन्ति, तेषां वाचं मुखं स्तम्भय स्तम्भय, जिह्वां कीलय
कीलय, बुद्धिं विनाशय विनाशय, ह्रीं ॐ स्वाहा
- पीले वस्त्र, पीला आसन, तथा हल्दी की माला का प्रयोग करें।
- चने की दाल से निर्मित यंत्र का विधान है।
- जप का उत्तम समय रात्रि 10 बजे से प्रातः 5 बजे के मध्य है।
- ३६ अक्षरी मंत्र का एक लाख जप द्वारा सिद्धि, विशेष हेतु पांच लाख जप करें।
- जप के बाद दशांश हवन एवं तर्पण आवश्यक।
- यह साधना अत्यंत उग्र मानी जाती है, अतः सदैव गुरु मार्गदर्शन में ही करें।
बगलामुखी दस महाविद्याओं में से एक हैं, जिनकी शक्ति स्तंभन के लिए प्रसिद्ध है।
ब्रह्मास्त्र मंत्र एवं 36 अक्षरी मंत्र उनके अत्यंत गोपनीय व शक्तिशाली मंत्रों में हैं।
इनकी साधना कठिन नियमों व गुरु मार्गदर्शन के बिना संभव नहीं। यह मंत्र साधक के
चारों ओर अभेद्य सुरक्षा कवच का निर्माण करते हैं एवं साधक को शत्रु एवं नकारात्मक शक्तियों से रक्षा प्रदान करते हैं।






