विस्तृत उत्तर
नागपाश प्राप्ति के विषय में पुराणिक परंपराओं में दो मत मिलते हैं।
पहला मत — नागपाश ब्रह्मा-निर्मित अस्त्र था और एक परंपरा के अनुसार भगवान शिव ने दुष्टों के संहार हेतु इसे ब्रह्मदेव से माँगकर मेघनाद को वरदान में दिया था।
दूसरा मत — वाल्मीकि रामायण में मेघनाद की तपस्या का वर्णन है जिसमें उसने भगवान शिव को प्रसन्न करके अनेक शक्तियाँ प्राप्त कीं। नागपाश भी शिव की कृपा से उसे मिला था।
मेघनाद की साधना — मेघनाद ने 12 वर्ष की आयु में ही कुलदेवी निकुम्भला की कठोर तपस्या करके सिद्धियाँ प्राप्त की थीं। उसके गुरु असुर-गुरु शुक्राचार्य थे। उसने इंद्र को भी युद्ध में परास्त किया था जिससे उसे 'इंद्रजीत' नाम मिला।
उपयोग नीति — मेघनाद नागपाश का प्रयोग केवल अत्यंत विकट परिस्थिति में ही करता था क्योंकि यह उसका सर्वाधिक गुप्त और घातक अस्त्र था।





