विस्तृत उत्तर
सबसे बाहरी और सबसे विशाल पुष्कर द्वीप शुद्ध और मीठे जल के सागर से घिरा है। यहाँ एक अत्यंत विशाल पुष्कर (कमल) का पुष्प स्थित है। इस द्वीप में केवल दो ही वर्ष हैं — रमणक और धातकि। यहाँ के निवासी साक्षात् परमेष्ठी ब्रह्मा जी की उपासना करते हैं। पुष्कर द्वीप में ब्रह्मा जी की उपासना का विशेष कारण यह है कि यह द्वीप सम्पूर्ण सप्तद्वीप मण्डल का सबसे बाहरी और विशाल द्वीप है और ब्रह्मा जी ही समस्त ब्रह्माण्ड के सृष्टिकर्ता हैं। पुष्कर (कमल) के पुष्प का उनसे सीधा संबंध है क्योंकि ब्रह्मा जी स्वयं कमल के आसन पर विराजते हैं और उनका प्राकट्य ही भगवान विष्णु की नाभि से उत्पन्न कमल से हुआ था। इस प्रकार पुष्कर द्वीप की यह विशेषता है कि यहाँ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के स्रष्टा की उपासना होती है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक



