विस्तृत उत्तर
ब्रह्मास्त्र के निर्माणकर्ता स्वयं परमपिता ब्रह्मा हैं। वेद-पुराणों में वर्णन मिलता है कि भगवान ब्रह्मा ने दैत्यों के नाश के लिए ब्रह्मास्त्र की उत्पत्ति की थी।
ब्रह्मास्त्र' का अर्थ ही है — 'ब्रह्म का अस्त्र' अर्थात ब्रह्मा जी का दिव्यास्त्र। यह ब्रह्मा के एक मुख की शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
मनुष्यों तक कैसे पहुँचा — प्रारंभ में ब्रह्मास्त्र देवी-देवताओं के पास ही था। देवताओं ने सबसे पहले गंधर्वों को इसे प्रदान किया। गंधर्वों से बाद में यह विशेष योद्धाओं ने प्राप्त किया। महाभारतकाल में यह द्रोणाचार्य, अश्वत्थामा, कृष्ण, कर्ण, युधिष्ठिर, प्रद्युम्न और अर्जुन जैसे गिने-चुने महायोद्धाओं के पास था। द्रोणाचार्य को इसकी प्राप्ति परशुराम (राम जामदग्न्य) से हुई थी और अर्जुन ने इसे द्रोण से पाया।
रामायणकाल में — विभीषण और लक्ष्मण के पास यह अस्त्र था।





