विस्तृत उत्तर
नहीं, पौराणिक शास्त्रों के अनुसार नारायणास्त्र का प्रतिकार किसी अन्य अस्त्र से संभव नहीं था। इसे केवल पूर्ण आत्मसमर्पण द्वारा ही शांत किया जा सकता था। यह गुण नारायणास्त्र को ब्रह्मास्त्र या पाशुपतास्त्र जैसे अन्य महाशक्तिशाली अस्त्रों से भी एक विशिष्ट श्रेणी में रखता है जिनके निवारण के लिए अन्य विशेष अस्त्र या विधियाँ वर्णित हैं। अस्त्र का प्रतिरोध करने पर यह और प्रचंड होता था इसलिए किसी जवाबी अस्त्र का प्रयोग करना विनाशकारी ही सिद्ध होता।
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