विस्तृत उत्तर
विनाश आसन्न देखकर भगवान श्रीकृष्ण जो नारायणास्त्र के रहस्य और उसकी प्रकृति से परिचित थे, ने तुरंत पांडवों और उनकी समस्त सेना को अपने-अपने शस्त्र त्यागकर, रथों और अन्य वाहनों से उतरकर, हाथ जोड़कर पूर्ण रूप से नारायणास्त्र के प्रति आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया। श्रीकृष्ण ने समझाया कि यही इस अस्त्र से बचने का एकमात्र उपाय है क्योंकि इसका प्रतिरोध करने पर यह और भी प्रचंड हो जाएगा। सभी योद्धाओं और सैनिकों ने श्रीकृष्ण की आज्ञा का पालन किया और पांडव सेना एक महाविनाश से बच गई।
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