📖
विस्तृत उत्तर
कथा में कहा गया है कि ब्रह्मा जी की नासिका से अंगूठे के अग्रभाग जितना सूक्ष्म वराह प्रकट हुआ। वह सूक्ष्म रूप तुरंत बढ़ता गया और पर्वताकार हो गया। यह दिखाता है कि दिव्य शक्ति आरंभ में सूक्ष्म दिखाई दे सकती है, लेकिन उसमें अनंत सामर्थ्य छिपा होता है। वराह का यह प्राकट्य सृष्टि की रक्षा के लिए विष्णु-शक्ति के सक्रिय होने का संकेत है।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?




