विस्तृत उत्तर
ब्रह्मास्त्र हिन्दू पुराणों और महाकाव्यों में वर्णित सर्वाधिक प्रसिद्ध और प्रचंड दिव्यास्त्र है। इसका उल्लेख रामायण, महाभारत, अग्नि पुराण और अहिर्बुध्न्य संहिता में मिलता है।
ब्रह्मास्त्र क्या है — यह एक मंत्र-चालित दिव्यास्त्र है जो स्वयं ब्रह्मा की शक्ति का प्रतीक है। जिस किसी पर भी यह चलाया जाए, उसका नाश अवश्यंभावी था। यह अचूक और अमोघ था।
इसके छोड़ने के परिणाम — ब्रह्मास्त्र के प्रयोग से भयानक प्रलयाग्नि उत्पन्न होती है जो जीव-जंतु, वनस्पति और समस्त चर-अचर वस्तुओं का नाश कर देती है। दो ब्रह्मास्त्रों के आपस में टकराने से संपूर्ण पृथ्वी के समाप्त होने का भय रहता था। जहाँ भी यह चलाया जाता था वहाँ 12 वर्षों तक भयानक दुर्भिक्ष पड़ जाता था।
महाभारत में वर्णन — सौप्तिक पर्व के अध्याय 13 से 15 तक ब्रह्मास्त्र के परिणाम विस्तार से दिए गए हैं। शत्रु क्षेत्र में 12 वर्ष वर्षा नहीं होती, संतान-हीनता और महामारी फैलती है।





