विस्तृत उत्तर
पिनाक धनुष के निर्माण के विषय में पुराणों में विभिन्न परंपराएं मिलती हैं।
विश्वकर्मा-कृत निर्माण — अधिकांश पुराणिक परंपराओं में कहा गया है कि पिनाक धनुष का निर्माण देव-शिल्पी विश्वकर्मा ने किया था। कथा के अनुसार ब्रह्माजी ने कण्व मुनि की तपस्या-स्थल पर उगे दिव्य बाँस को काटकर विश्वकर्मा को दिया। विश्वकर्मा ने उससे दो अत्यंत दिव्य धनुष बनाए — एक 'पिनाक' और दूसरा 'सारंग'। पिनाक भगवान शिव को और सारंग भगवान विष्णु को समर्पित किया गया।
एक अन्य मत — एक परंपरा के अनुसार शिव ने स्वयं इसका निर्माण किया था। वाल्मीकि रामायण में भी इसके संदर्भ हैं।
मूल बात यह है कि चाहे निर्माण विश्वकर्मा ने किया हो, पिनाक मूलतः भगवान शिव का धनुष था जो उनकी दिव्य शक्ति से सिद्ध और संचालित था।





