विस्तृत उत्तर
परशुराम को शिव का फरसा (परशु) प्राप्त होने की कथा शिव पुराण और विभिन्न पुराणों में वर्णित है। परशुराम भगवान विष्णु के अवतार हैं परंतु उनके आराध्य देव भगवान शिव हैं।
परशुराम की शिव-भक्ति — परशुराम ने भगवान शिव की घोर तपस्या की। उनकी अनन्य भक्ति और शस्त्र-विद्या में निपुणता देखकर भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए।
परशु की प्राप्ति — शिव ने परशुराम को उनके दिव्य परशु (फरसा) की प्राप्ति का वरदान दिया। एक कथा के अनुसार शिव ने परशुराम को धर्म की रक्षा के लिए यह फरसा दिया और उसे उठाने की शक्ति भी प्रदान की। परशुराम इसी फरसे के कारण 'परशुराम' — अर्थात 'परशु धारण करने वाले राम' — कहलाए।
पिनाक धनुष का संबंध — परशुराम ने पिनाक धनुष की भी नित्य पूजा-अर्चना की। यह धनुष परशुराम के माध्यम से ही राजा जनक के पूर्वज देवरात को मिला था जो अंत में सीता स्वयंवर में राम द्वारा तोड़ा गया।





