विस्तृत उत्तर
पाशुपतास्त्र भगवान शिव का सर्वाधिक विनाशकारी दिव्यास्त्र है। 'पशुपति' शिव का ही एक नाम है, इसलिए 'पाशुपतास्त्र' = पशुपति का अस्त्र।
पाशुपतास्त्र की विशेषताएं —
यह अस्त्र मन, नेत्र, वाणी और धनुष — चारों माध्यमों से चलाया जा सकता है। तीनों लोकों में कोई भी प्राणी ऐसा नहीं है जो इसके प्रहार से बच सके। ब्रह्मास्त्र भी इसे रोक नहीं सकता। शिव पुराण और महाभारत दोनों में इसे सर्वसंहारक अस्त्र बताया गया है।
सावधानी — शिव ने स्वयं कहा है कि इसे किसी कमजोर या साधारण शत्रु पर कभी नहीं चलाना चाहिए। यदि ऐसा किया तो यह चलाने वाले और संपूर्ण संसार को भस्म कर सकता है।
अर्जुन को प्राप्ति — महाभारत में शिव ने किरात-अवतार में अर्जुन की परीक्षा ली और प्रसन्न होकर पाशुपतास्त्र प्रदान किया।
रामायण में — मेघनाद ने इस अस्त्र का उपयोग किया था। श्रीराम के पास भी पाशुपतास्त्र था।





