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शिव अस्त्र-शस्त्र प्रश्नोत्तर — 21 प्रश्न

शिव अस्त्र-शस्त्र से जुड़े 21 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 21 प्रश्न

त्रिशूल के तीन बिंदुओं का क्या अर्थ है

त्रिशूल के तीन बिंदु — त्रिगुण (सत्व-रज-तम), त्रिकाल (भूत-वर्तमान-भविष्य), त्रिदेव (ब्रह्मा-विष्णु-महेश), त्रिताप (दैहिक-दैविक-भौतिक) और त्रिलोक (स्वर्ग-भूमि-पाताल) के प्रतीक हैं।

त्रिशूल अर्थतीन बिंदुशिव दर्शन
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त्रिशूल में तीन शिर क्यों होते हैं

त्रिशूल के तीन शिर तीन गुण (सत्व-रज-तम), तीन काल (भूत-वर्तमान-भविष्य), तीन ताप (दैहिक-दैविक-भौतिक) और तीन लोकों पर शिव की सर्वाधिकार-शक्ति के प्रतीक हैं।

त्रिशूल तीन शिरत्रिशूल प्रतीकतीन गुण
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त्रिशूल के तीन बिंदुओं का क्या अर्थ है शिव पुराण में

त्रिशूल के तीन शूल — तीन गुण (सत-रज-तम), तीन काल (भूत-भविष्य-वर्तमान), तीन ताप (दैहिक-दैविक-भौतिक) और तीन लोकों के अधिपति शिव की सर्वशक्तिमता के प्रतीक हैं।

त्रिशूल प्रतीकतीन शूल अर्थसत्व रज तम
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शिव पुराण में त्रिशूल के बारे में क्या लिखा है

शिव पुराण में त्रिशूल को शिव का सर्वाधिक अचूक शस्त्र बताया गया है। अंधकासुर, शंखचूड़, जलंधर जैसे दानवों का वध इससे हुआ। काशी शिव के त्रिशूल पर स्थित है।

त्रिशूल महिमाशिव पुराणअचूक अस्त्र
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शिव जी के पास कहां से आया त्रिशूल

शिव पुराण के अनुसार त्रिशूल शिव का स्वयंभू और नित्य शस्त्र है — इसके निर्माणकर्ता स्वयं शिव हैं। यह उनका अभिन्न शस्त्र है जो उन्होंने कभी किसी को नहीं दिया।

त्रिशूल उत्पत्तिशिव स्वयंभूदिव्य शस्त्र
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चंद्रहास रावण को कैसे मिली

रावण ने कैलाश उठाने के बाद शिव के पैर से दबने पर दर्द में शिव तांडव स्तोत्र रचा। प्रसन्न शिव ने चंद्रहास खड्ग, अजेयता और 'रावण' नाम दिया — साथ में चेतावनी कि दुरुपयोग पर तलवार वापस आ जाएगी।

चंद्रहासरावणकैलाश
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चंद्रहास तलवार क्या है

चंद्रहास शिव की दिव्य तलवार है जो उन्होंने रावण को उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर दी थी। जब रावण ने सीता-हरण में जटायु पर इसका दुरुपयोग किया, तब यह स्वतः शिव के पास लौट गई।

चंद्रहासशिव खड्गदिव्य तलवार
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शिव का फरसा परशुराम को कैसे मिला

परशुराम ने शिव की घोर तपस्या की। शिव ने प्रसन्न होकर धर्म-रक्षा के लिए दिव्य परशु (फरसा) दिया और उसे उठाने की शक्ति भी प्रदान की। इसी से वे 'परशुराम' कहलाए।

परशुपरशुरामफरसा
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पाशुपतास्त्र किसने बनाया था

पाशुपतास्त्र भगवान शिव का स्वयं-सिद्ध दिव्यास्त्र है। पुराणों के अनुसार शिव ने इसे आदि पराशक्ति से सृष्टि से पहले ही प्राप्त किया था। यह शिव, काली और परा-शक्ति का संयुक्त अस्त्र है।

पाशुपतास्त्र निर्माणशिवआदि परा शक्ति
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शिव का पाशुपतास्त्र क्या है

पाशुपतास्त्र शिव का सर्वशक्तिशाली दिव्यास्त्र है — मन, नेत्र, वाणी या धनुष किसी से भी चलाया जा सकता है। सम्पूर्ण सृष्टि का विनाश कर सकता है। महाभारत में शिव ने यह अर्जुन को दिया था।

पाशुपतास्त्रमहाविनाशकदिव्यास्त्र
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भवरेंदु चक्र क्या है

'भवरेंदु' शिव के चक्र का एक नाम है। 'भव' = शिव, 'रेंदु' = चक्र। यह नाम कुछ परंपराओं में मिलता है। अधिक प्रचलित नाम 'सुदर्शन' है जो शिव ने विष्णु को दिया था।

भवरेंदुशिव चक्रदिव्यास्त्र
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शिव जी के चक्र का नाम क्या था

शिव के चक्र के दो नाम मिलते हैं — 'भवरेंदु' (कुछ ग्रंथों में) और 'सुदर्शन' (अधिक प्रचलित)। पुराणों में वर्णित है कि सुदर्शन चक्र मूलतः शिव का था जो उन्होंने विष्णु को प्रदान किया।

शिव चक्रसुदर्शनभवरेंदु
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रामायण में उस धनुष का नाम क्या था जो राम ने तोड़ा था

राम ने सीता स्वयंवर में जो धनुष तोड़ा उसका नाम 'पिनाक' था, जिसे 'शिवधनुष' भी कहते हैं। यह भगवान शिव का दिव्य धनुष था जो राजा जनक के पास धरोहर के रूप में था।

पिनाकशिवधनुषराम
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पिनाक धनुष राम ने सीता स्वयंवर में कैसे तोड़ा

राजा जनक के स्वयंवर में गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से राम ने पिनाक धनुष सहज भाव से उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते समय वह टूट गया। इसी से सीता का विवाह राम से हुआ।

पिनाकसीता स्वयंवरराम
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शिव जी ने पिनाक धनुष से किसका वध किया था

शिव ने पिनाक धनुष से त्रिपुरासुर के तीन अभेद्य उड़नशील नगरों को एक ही बाण से भस्म किया। तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली का अंत हुआ — इसीलिए शिव 'त्रिपुरांतक' हैं।

पिनाकत्रिपुरासुरत्रिपुरांतक
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पिनाक धनुष किसने बनाया था

पिनाक धनुष का निर्माण देव-शिल्पी विश्वकर्मा ने किया था — दिव्य बाँस से। उन्होंने दो धनुष बनाए — पिनाक शिव को और सारंग विष्णु को दिया।

पिनाक निर्माणविश्वकर्माब्रह्मा
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पिनाक धनुष कितना शक्तिशाली था

पिनाक धनुष की टंकार से पर्वत काँपते थे, बादल फटते थे। इसी एक बाण से शिव ने त्रिपुरासुर की तीनों अभेद्य नगरियों को नष्ट किया। महाबली रावण भी इसे नहीं उठा सका।

पिनाक शक्तित्रिपुरासुर वधअप्रतिम धनुष
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शिव जी के धनुष का नाम क्या है

शिव जी के धनुष का नाम 'पिनाक' है। इसी से शिव को 'पिनाकी' कहते हैं। इसी धनुष से त्रिपुरासुर-वध हुआ और बाद में सीता स्वयंवर में राम ने इसे तोड़ा।

पिनाकशिव धनुषदिव्य धनुष
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शिव पुराण के अनुसार शिव जी के कितने अस्त्र-शस्त्र हैं

शिव के प्रमुख अस्त्र-शस्त्र हैं — त्रिशूल (शस्त्र), पिनाक (धनुष), पाशुपतास्त्र (दिव्यास्त्र), चंद्रहास (तलवार), परशु (फरसा) और सुदर्शन चक्र जो विष्णु को दिया।

शिव अस्त्र सूचीपिनाक त्रिशूल पाशुपतास्त्र चंद्रहासशिव शस्त्र
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शिव जी का त्रिशूल किसने बनाया था

शिव पुराण के अनुसार त्रिशूल के निर्माणकर्ता स्वयं भगवान शिव हैं। यह उनका स्वयंभू शस्त्र है जो उनके साथ ही प्रकट हुआ।

त्रिशूल निर्माणशिव पुराणस्वयंभू
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शिव जी के त्रिशूल का नाम क्या है

शिव जी के त्रिशूल का नाम 'त्रिशूल' ही है। कुछ ग्रंथों में इसे 'विजय' भी कहा गया है। यह उनका सर्वाधिक शक्तिशाली और नित्य शस्त्र है।

त्रिशूलशिव शस्त्रमहाअस्त्र
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शिव अस्त्र-शस्त्र — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर शिव अस्त्र-शस्त्र श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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शिव अस्त्र-शस्त्र को गहराई से समझने का तरीका

शिव अस्त्र-शस्त्र प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

21 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।