विस्तृत उत्तर
त्रिशूल की उत्पत्ति के विषय में शिव पुराण की मान्यता यह है कि त्रिशूल भगवान शिव का स्वयंभू और नित्य शस्त्र है — यह उनके साथ ही प्रकट हुआ।
शिव पुराण में — शिव पुराण में वर्णित है कि त्रिशूल और पिनाक धनुष के निर्माणकर्ता स्वयं भगवान शिव हैं। उन्होंने इन सभी अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण स्वयं किया था।
त्रिशूल शिव का नित्य शस्त्र — शिव जी के पास जो भी दिव्य अस्त्र-शस्त्र थे उन्होंने समय के साथ देवताओं और भक्तों को प्रदान कर दिए — पिनाक धनुष देवताओं को, सुदर्शन चक्र विष्णु को, चंद्रहास रावण को, पाशुपतास्त्र अर्जुन को। परंतु त्रिशूल उन्होंने किसी को नहीं दिया — यह उनका नित्य और अभिन्न शस्त्र है।
त्रिशूल की दिव्यता — त्रिशूल शिव की सर्वशक्तिमता का प्रतीक है। इसे शिव ने स्वयं अपनी दिव्यशक्ति से सिद्ध किया है। इसके प्रयोग से शिव और पार्वती के अलावा कोई भी देव या दानव नहीं बच सकता।





