विस्तृत उत्तर
रामायण में सीता स्वयंवर में जो धनुष राम ने तोड़ा था उसका नाम 'पिनाक' था — इसे 'शिवधनुष' भी कहते हैं।
वाल्मीकि रामायण में इसे 'शिवधनुष' कहा गया है क्योंकि यह भगवान शिव का धनुष था। इसका मूल नाम 'पिनाक' है। शिव के इस धनुष को धारण करने के कारण ही उनका एक नाम 'पिनाकी' भी है।
रामायण में इस धनुष की प्राप्ति की कथा — बालकांड में विश्वामित्र जी कहते हैं कि यह धनुष पहले देवताओं का था, फिर देवरात (जनक के पूर्वज) को दिया गया। राजा जनक को यह वारुण देवता से यज्ञ के प्रसाद के रूप में भी मिला बताया जाता है।
महत्वपूर्ण — सीता स्वयंवर में राम ने जो धनुष तोड़ा वह शिव का 'पिनाक' था। बाद में जब परशुराम आए तो उन्होंने राम से 'सारंग' (विष्णु का धनुष) चलाने की चुनौती दी। ये दोनों अलग-अलग धनुष थे।





