विस्तृत उत्तर
पिनाक धनुष तोड़ने का प्रसंग रामायण की सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है।
गुरु विश्वामित्र के साथ जनकपुरी पहुँचे श्रीराम और लक्ष्मण को राजा जनक ने विशाल पिनाक धनुष दिखाया। वाल्मीकि रामायण में वर्णन है कि धनुष को आठ पहियों वाले एक विशाल लोहे के संदूक में रखकर पाँच हज़ार पुरुष खींचकर लाए। यह देखकर श्रीराम का मन उत्साहित हुआ।
विश्वामित्र की आज्ञा पाकर श्रीराम धीमी और शांत चाल से धनुष के पास गए। उन्होंने पिनाक को प्रणाम किया — भाव, श्रद्धा और विनम्रता से। रामचरितमानस में तुलसीदास जी ने इसे बहुत सुंदर रूप से लिखा है कि राम की विनम्रता से धनुष का भारीपन समाप्त हो गया।
श्रीराम ने बाएँ हाथ से धनुष को बीच से पकड़ा, खेल-खेल में उठाया, प्रत्यंचा चढ़ाई और जैसे ही धनुष को कान तक खींचा, वह भयंकर गर्जना के साथ दो टुकड़ों में टूट गया। उस टंकार से तीनों लोक हिल गए और अधिकांश दर्शक मूर्छित हो गए। इसके बाद जनक ने सीता का विवाह राम से सम्पन्न किया।





