अस्त्र शस्त्रपिनाक धनुष राम ने कैसे तोड़ा?विश्वामित्र की आज्ञा पर राम शांत भाव से पिनाक के पास गए, उसे प्रणाम करके सहजता से उठाया, प्रत्यंचा चढ़ाई और धनुष खींचते ही वह भयंकर गर्जना के साथ दो टुकड़ों में टूट गया।#पिनाक#राम#धनुष भंग
रामचरितमानस — बालकाण्डविश्वामित्रजी ने श्रीरामजी से धनुष तोड़ने के लिये क्या कहा?'उठहु राम भंजहु भवचापा। मेटहु तात जनक परितापा' — उठो राम, शिवजी का धनुष तोड़ो, जनक का सन्ताप मिटाओ। गुरु की आज्ञा पर रामजी उठे और सहज भाव से धनुष तोड़ दिया।#बालकाण्ड#विश्वामित्र आज्ञा#धनुष भंग