विस्तृत उत्तर
परशुराम के फरसे का नाम 'परशु' है — और कुछ ग्रंथों में इसे 'विद्युदभि' नाम से भी जाना जाता है।
परशु' संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है कुल्हाड़ी या फरसा। यह कोई साधारण फरसा नहीं था — यह भगवान शिव द्वारा प्रदत्त दिव्य अस्त्र था। इसी परशु के कारण उनका नाम 'परशुराम' हो गया — अर्थात जो राम परशु धारण करते हैं।
विकिपीडिया और विष्णु पुराण के अनुसार परशुराम का मूल नाम 'राम' था। जब भगवान शिव ने उन्हें कैलाश पर तपस्या के बाद 'विद्युदभि' नामक परशु (दिव्य फरसा) प्रदान किया, तब से वे 'परशुराम' कहलाए।
यह परशु इतना शक्तिशाली था कि इससे परशुराम ने हैहयवंशी सहस्त्रार्जुन की हजारों भुजाएं काटकर उसका वध किया और 21 बार पृथ्वी से अधर्मी क्षत्रियों का संहार किया।
कुछ ग्रंथों में इसे 'भार्गवास्त्र' भी कहा गया है। यह अस्त्र-शस्त्र और सरल हथियार का संयोजन था — एक ही साथ भौतिक शस्त्र और दिव्यास्त्र दोनों था।





