विस्तृत उत्तर
परशुराम को शिव जी से फरसा प्राप्त होने की कथा उनकी घोर तपस्या और अटूट भक्ति से जुड़ी है।
परशुराम का मूल नाम 'राम' था। वे जन्म से शिव के परम भक्त थे। महर्षि जमदग्नि के पुत्र इस बालक में बचपन से ही शस्त्र के प्रति अद्भुत रुचि थी। परशुराम ने शस्त्र विद्या की शिक्षा पहले महर्षि विश्वामित्र और ऋचीक से प्राप्त की, फिर कैलाश पर जाकर स्वयं भगवान शिव की घोर तपस्या आरंभ की।
कैलाश पर उन्होंने वर्षों तक कठोर तपस्या की — अन्न-जल त्याग, ध्यान और शिव-भक्ति में लीन रहे। उनकी अटूट साधना और भक्ति से भगवान शिव प्रसन्न हुए और प्रकट हुए। शिव ने परशुराम को अनेक दिव्यास्त्र-शस्त्र दिए और उनमें से एक था दिव्य परशु (फरसा) जिसे 'विद्युदभि' भी कहते हैं।
शिव ने परशुराम से कहा कि वे इस परशु से पृथ्वी को अधर्मियों से मुक्त करें। इसी परशु को पाने के बाद राम का नाम 'परशुराम' हो गया — 'परशु + राम' = परशुराम। शिव स्वयं उनके गुरु भी बने और संपूर्ण युद्धकला का ज्ञान दिया।





