विस्तृत उत्तर
वाल्मीकि रामायण के बालकांड (27वें सर्ग) में महर्षि विश्वामित्र द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण को दिए गए अस्त्रों का विस्तृत वर्णन मिलता है। यह ध्यान रखना चाहिए कि 'राघव', 'रघुनंदन' जैसे शब्द राम और लक्ष्मण दोनों के लिए प्रयुक्त हैं, इसलिए अधिकांश अस्त्र दोनों को मिले।
पहले बला और अतिबला विद्याएं मिलीं — ब्रह्मा की पुत्रियाँ, जो भूख-प्यास और थकान का नाश करती हैं। ताड़का वध के बाद पाँच दिव्य चक्र: दण्डचक्र, धर्मचक्र, कालचक्र, विष्णुचक्र, ऐन्द्रचक्र। वज्रास्त्र, शिव का शूल, ब्रह्मशिर (ब्रह्मास्त्र से चार गुना शक्तिशाली), ब्रह्मास्त्र। मोदकी और शिखर नामक दो दिव्य गदाएं। नारायणास्त्र, आग्नेयास्त्र, वायव्यास्त्र, हयशिरास्त्र, क्रौंचास्त्र। धर्मपाश, कालपाश, वरुणपाश। मोहन, प्रस्वापन, प्रशमन, सौम्य, वर्षण, संतापन, विलापन, मादनास्त्र। गन्धर्वास्त्र, मानवास्त्र, पैशाचास्त्र, तामस, सौमनास्त्र।
इसके बाद 50 गुप्त दिव्यास्त्र भी दिए जो प्रजापति कृशाश्व के पुत्र माने जाते हैं और इच्छानुसार रूप धारण कर सकते हैं। कुल मिलाकर 80+ दिव्यास्त्र राम को प्राप्त हुए।





