विस्तृत उत्तर
अर्जुन वनवास काल में एक वर्ष स्वर्गलोक इंद्र की पुरी अमरावती में रहे और वहाँ से अनेक दिव्यास्त्र प्राप्त किए।
तपस्या और प्रस्थान — पाशुपतास्त्र प्राप्ति के बाद हिमालय में तपस्या करते अर्जुन को इंद्र ने देवदूत भेजकर स्वर्ग में आमंत्रित किया। अर्जुन देवराज इंद्र के पास अमरावती पहुँचे।
इंद्र से प्राप्त अस्त्र — वज्रास्त्र, सम्मोहनास्त्र (शत्रु को मोहित करने वाला), इंद्रास्त्र (असंख्य बाणों की वर्षा), अनेक दिव्य और रहस्यमय अस्त्र।
निवातकवच युद्ध — इंद्र ने अर्जुन को अपने शत्रु निवातकवच दैत्यों से युद्ध करने को कहा। इस युद्ध में अर्जुन ने रुद्रास्त्र का प्रयोग करके 3 करोड़ असुरों का एक ही प्रहार में वध किया। यह भारतकोश में वर्णित है।
यम-वरुण-कुबेर से — उसी अवसर पर यमराज, वरुणदेव और कुबेर भी प्रकट हुए और उन्होंने अपने-अपने अस्त्र अर्जुन को प्रदान किए।
संगीत-नृत्य — इंद्र ने चित्रसेन से अर्जुन को संगीत और नृत्य कला भी सिखवाई। अर्जुन एक वर्ष इंद्र के पास रहे।





