विस्तृत उत्तर
ब्रह्मास्त्र को वापस लेना उतना ही कठिन था जितना इसे चलाना — और दोनों के लिए पूर्ण ज्ञान एवं असाधारण आध्यात्मिक शक्ति आवश्यक थी।
वापस लेने की विधि — जिस प्रकार विशेष मंत्र से ब्रह्मास्त्र चलाया जाता था, उसी प्रकार संहार (वापस लेने का) मंत्र से इसे वापस बुलाया जाता था। इसे 'अस्त्र का उपसंहार' या 'प्रत्याहार' कहते हैं। योद्धा को ब्रह्मा का पुनः ध्यान करके संहार बीज मंत्र का उच्चारण करना होता था।
महाभारत का सर्वप्रसिद्ध उदाहरण — जब अश्वत्थामा और अर्जुन ने एक साथ ब्रह्मास्त्र चलाए और ऋषि व्यास-नारद के हस्तक्षेप पर वापस लेने को कहा गया, तो अर्जुन ने तुरंत अपना ब्रह्मास्त्र वापस ले लिया। परंतु अश्वत्थामा ने कहा — 'मुझे वापस लेने का ज्ञान नहीं है।' यह उसकी अज्ञानता का प्रमाण था। उसने ब्रह्मास्त्र को उत्तरा के गर्भ की ओर मोड़ा जिससे गर्भ में परीक्षित की मृत्यु हुई जिन्हें बाद में श्रीकृष्ण ने जीवित किया।
इस प्रसंग से स्पष्ट है कि केवल पूर्ण ज्ञानी योद्धा ही ब्रह्मास्त्र वापस ले सकता था — जो जानता हो वह संहार करे, जो न जाने वह इसे चलाने का अधिकारी नहीं।





