विस्तृत उत्तर
द्रोणाचार्य महाभारत के सर्वश्रेष्ठ शिक्षक थे और उन्होंने अपने शिष्यों को विभिन्न स्तरों पर दिव्यास्त्र दिए।
अर्जुन को — द्रोण ने अर्जुन को सर्वाधिक दिव्यास्त्र दिए। ब्रह्मास्त्र: प्रयोग और उपसंहार (वापस लेने की विधि) सहित। ब्रह्मशिरास्त्र: प्रयोग और उपसंहार सहित — यह ब्रह्मास्त्र से चार गुना शक्तिशाली था। अर्जुन द्रोण के सबसे प्रिय और सर्वश्रेष्ठ शिष्य थे।
अश्वत्थामा को — ब्रह्मास्त्र, ब्रह्मशिरास्त्र (लेकिन वापस लेने की विधि नहीं), नारायणास्त्र। अश्वत्थामा को पिता द्रोण ने सब दिया लेकिन संहार-ज्ञान नहीं दिया — यही कारण था कि बाद में वह ब्रह्मास्त्र वापस नहीं ले पाया।
युधिष्ठिर को — ब्रह्मास्त्र का ज्ञान था।
कौरवों को — द्रोण ने दुर्योधन सहित सभी कौरवों को धनुर्विद्या की सामान्य शिक्षा दी लेकिन उच्चतम दिव्यास्त्र केवल योग्य शिष्यों को।
विशेष — द्रोण ने एकलव्य को शिक्षा नहीं दी थी (अर्जुन की श्रेष्ठता बनाए रखने के लिए अंगूठा माँगा)। कर्ण को भी द्रोण ने शिक्षा से वंचित रखा था जिससे कर्ण परशुराम के पास गया।





