विस्तृत उत्तर
अश्वत्थामा गुरु द्रोणाचार्य का पुत्र था और उसे पिता से असाधारण अस्त्र-शस्त्र शिक्षा मिली थी। उसके पास महाभारत के सबसे शक्तिशाली दिव्यास्त्र थे।
ब्रह्मास्त्र — पिता द्रोणाचार्य से प्राप्त। यह अस्त्र उसने अर्जुन पर चलाया था। अर्जुन ने पाशुपतास्त्र से इसका प्रतिकार किया।
ब्रह्मशिरास्त्र — ब्रह्मास्त्र से चार गुना शक्तिशाली। इसे अश्वत्थामा ने उत्तरा के गर्भ की ओर छोड़ा था। यह महाभारत का सबसे विनाशकारी प्रयोग था।
नारायणास्त्र — द्रोणाचार्य ने भगवान नारायण की उपासना से प्राप्त करके अश्वत्थामा को दिया था। इसे कुरुक्षेत्र में अश्वत्थामा ने पांडव सेना पर चलाया था — जो एक ही युद्ध में एक ही बार चलाया जा सकता था।
मस्तक में 'सिरोन रत्न' मणि — जन्म से ही भगवान शिव की कृपा से। इस मणि के कारण अश्वत्थामा दैत्य, दानव, शस्त्र, व्याधि, देवता, नाग — किसी से भी नहीं डरता था। इस मणि के बाद अर्जुन ने उसे मुक्त किया।





