विस्तृत उत्तर
गांडीव धनुष की अनेक असाधारण और दिव्य विशेषताएं पुराणों में वर्णित हैं।
शक्ति की दृष्टि से — गांडीव को एक साथ एक लाख धनुषों के बराबर शक्ति वाला माना जाता था। यह किसी भी शस्त्र से नष्ट नहीं हो सकता था। इसकी 108 दिव्य प्रत्यंचाएं थीं जो अकाट्य थीं।
कार्यात्मक दृष्टि से — इससे एक साथ अनेक लक्ष्यों को भेदा जा सकता था। जो भी इसे धारण करता था उसमें अतिरिक्त शक्ति का संचार हो जाता था। इसकी टंकार इतनी भयंकर थी कि पूरा युद्धक्षेत्र कंपित हो जाता था। देव, दानव और गंधर्व — सभी इस धनुष की पूजा करते थे।
साथ में अक्षय तरकश — इसके साथ दो अक्षय तरकश भी थे जिनमें बाण कभी समाप्त नहीं होते थे। यह संयोजन अर्जुन को व्यावहारिक रूप से अजेय बनाता था।
अनन्य धारकता — माना जाता था कि अर्जुन के अतिरिक्त कोई अन्य इस धनुष को ठीक से धारण नहीं कर सकता था। महाभारत युद्ध के बाद, पांडवों की स्वर्ग-यात्रा के समय अर्जुन ने इसे अग्निदेव को लौटाया जिन्होंने वरुण को दिया।





