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अर्जुन ने भीष्म पर कौन सा अस्त्र चलाया था?

अर्जुन ने शिखंडी की आड़ से गांडीव के बाणों की निरंतर वर्षा से भीष्म को शरशय्या पर गिराया।

संक्षिप्त उत्तर

अर्जुन ने शिखंडी की आड़ से गांडीव के बाणों की निरंतर वर्षा से भीष्म को शरशय्या पर गिराया। कोई एकल दिव्यास्त्र नहीं — बाणों की अविराम धारा से शरीर छलनी हुआ।

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विस्तृत उत्तर

अर्जुन ने भीष्म को गिराने के लिए मुख्यतः साधारण बाणों की अविराम वर्षा की — न कि किसी एकल दिव्यास्त्र का प्रयोग किया।

यह प्रसंग महाभारत के भीष्मपर्व में है। कुरुक्षेत्र के 10वें दिन श्रीकृष्ण की सलाह पर पांडवों ने शिखंडी को भीष्म के सामने रखा। शिखंडी की पुरानी अंबा-पहचान के कारण भीष्म ने उस पर शस्त्र नहीं उठाया।

अर्जुन शिखंडी के पीछे खड़े होकर गांडीव से बाणों की निरंतर वर्षा करते रहे। भीष्म पूरी तरह से देख नहीं पाते थे कि पीछे अर्जुन है। शिखंडी के तीर तो भीष्म के कवच से टकराकर गिर जाते थे, परंतु अर्जुन के तीर उनके शरीर को छेदते रहे।

युद्ध के दौरान एक प्रसंग में भीष्म ने प्रतिरोध किया तब अर्जुन ने कुछ विशेष बाणों का प्रयोग किया जिससे भीष्म के अस्त्र-शस्त्र उनके हाथ से गिर गए। अंत में भीष्म का शरीर बाणों से इतना छलनी हो गया कि वे रथ से गिर पड़े — परंतु पृथ्वी पर नहीं गिरे, अर्जुन के बाणों की शरशय्या पर लेट गए।

उल्लेखनीय है — भीष्म को जल देने के लिए अर्जुन ने 'पर्जन्यास्त्र' से धरती में बाण मारा जिससे शुद्ध जल की धारा निकली।

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