विस्तृत उत्तर
महाभारत में ब्रह्मास्त्र अत्यंत दुर्लभ था — केवल कुछ चुने हुए महान योद्धाओं के पास यह था।
रामायण काल से महाभारत तक — परशुराम के पास था जो उन्हें रामजामदग्न्य से मिला था। परशुराम ने द्रोणाचार्य को दिया। रामायण में श्रीराम, लक्ष्मण, मेघनाद (इंद्रजीत), रावण और विभीषण के पास भी ब्रह्मास्त्र था।
महाभारत के प्रमुख धारक — द्रोणाचार्य: परशुराम से प्राप्त। अर्जुन: द्रोणाचार्य से प्राप्त। अश्वत्थामा: पिता द्रोण से। भीष्म: परशुराम से प्राप्त और उनके आगे द्वंद्व युद्ध में जिन्होंने बराबरी की। कर्ण: द्रोण और परशुराम से। श्रीकृष्ण: स्वयं भगवान विष्णु के अवतार होने से इनके पास भी था।
महाभारत के सौप्तिकपर्व में उल्लेख है कि युधिष्ठिर और प्रद्युम्न को भी यह ज्ञात था। परंतु सर्वाधिक प्रसिद्ध प्रसंग अश्वत्थामा और अर्जुन का है जब दोनों ने एक साथ ब्रह्मास्त्र चलाया और व्यास-नारद को हस्तक्षेप करना पड़ा।





