विस्तृत उत्तर
ब्रह्मशिरास्त्र का सर्वाधिक प्रसिद्ध और विनाशकारी प्रयोग महाभारत में अश्वत्थामा ने किया था।
यह प्रसंग महाभारत के सौप्तिकपर्व में है। महाभारत युद्ध में पांडवों की विजय के बाद अश्वत्थामा रात को पांडव शिविर में घुसकर द्रौपदी के पाँचों पुत्रों को सोते में मार आया। जब यह बात पता चली तो पांडवों ने उसका पीछा किया।
अश्वत्थामा ने बचने के लिए पहले ब्रह्मास्त्र चलाया। अर्जुन ने भी उत्तर में ब्रह्मास्त्र चलाया। जब ऋषि व्यास और नारद के हस्तक्षेप पर दोनों को अपने-अपने अस्त्र वापस लेने को कहा गया, अर्जुन ने अपना वापस ले लिया परंतु अश्वत्थामा को संहार ज्ञान नहीं था।
तब अश्वत्थामा ने क्रोध और बदले में पांडव वंश के नाश के लिए अपने ब्रह्मशिरास्त्र को अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ की ओर मोड़ दिया। गर्भ में पल रहे परीक्षित की मृत्यु हो गई। परंतु भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से परीक्षित को पुनर्जीवित किया।
कुछ ग्रंथों में यह भी उल्लेख है कि अर्जुन को द्रोणाचार्य ने ब्रह्मशिरास्त्र दिया था और इसका उल्लेख है कि यह अस्त्र मनुष्यों पर नहीं चलाना चाहिए।





